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भारत को फ्रांस से लेनी होगी दलहन का उत्पादन बढ़ाने के लिए सीख

5 वर्ष पहले
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दाल-रोटीखाने का प्रचलन भारत जैसे शाकाहारी प्रवृत्ति वाले देश में ही अधिक है। शायद इसी कारण यहां दलहन की बुवाई दुनिया में सबसे अधिक क्षेत्रफल में होती है। पूरे विश्व में दलहनी फसलों के रकबे और उत्पादन में भारत का योगदान क्रमश: 34 और 25 प्रतिशत है। फिर भी देश में दलहन की उत्पादकता 780 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर ही है, जबकि फ्रांस में 4219 किलोग्राम, कनाडा की 1936 किलोग्राम, यूएसए की 1882 किलोग्राम, रूस की 1643 किलोग्राम और चीन की 1596 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर की है। फ्रांस में दलहन की पूरी खेती जैविक तकनीक पर आधारित है। देश में दलहन का उत्पादन बढ़ाने के लिए फ्रांस की तकनीक का अनुसरण करना होगा, ताकि प्रति हैक्टेयर उत्पादकता बढ़े तो कम से कम आयात से छुटकारा मिल सकता है।

फ्रांसमें खेती की उन्नत तकनीक : वैसेभारत और राजस्थान दोनों ही स्थानों पर खेती की नई तकनीक के लिए इजराइल का अनुसार किया जाता है। लेकिन, अगर दलहन के मामले में देखा जाए तो फ्रांस जैसे देश को आदर्श कहा जा सकता है। फ्रांस में पूरी तरह से जैविक खेती पर ही जोर दिया जाता है। हालांकि इसके रकबा के अनुसार आकलन किया जाए तो 15 देशों की सूची में भारत पहले स्थान पर और फ्रांस अंतिम पायदान है। वहीं, उत्पादकता में फ्रांस अव्वल और भारत 14 वें स्थान पर है। दुनिया में 171 देशों में कुल रकबा 723 लाख हैक्टेयर में दलहन का उत्पादन होता है। जलवायु और बारिश कारण हो सकता है, लेकिन तकनीकी रूप से जैविक खेती को अपनाने के तरीके का अनुसरण मौका मुआयना करके किया जा सकता है।

सूखेके साथ अन्य कई कारण : देशमें राजस्थान सहित अधिकांश राज्य सूखे और अकाल की समस्या से जूझते रहते हैं। ऐसे में दलहन के उत्पादन की अधिक अपेक्षा करना उचित नहीं है। इसके अलावा भी कई कारण है यहां। इसमें दलहन की खेती वर्षा पर निर्भर होना, उच्च उपज वाली किस्मों का अभाव, अवैज्ञानिक शस्य प्रबंध और जैविक कारण मुख्य रूप से माने जाते हैं। हमारे यहां कीट और रोगों से मुक्त करने के लिए वैज्ञानिक स्तर पर कई सारे प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन असल में ये अंतिम श्रेणी के किसान तक नहीं पहुंच पाते हैं। सरकार ने ऑन लाइन या ई-सूचना तंत्र तो विकसित कर दिया, लेकिन शिक्षा की कमी के चलते देश का किसान अभी ई-फ्रैंडली नहीं हो पाया है। ऐसे में सूचना नहीं पहुंच पाती है।

जयपुर | दलहन में उत्पादन कम होने का मुख्य कारण इन फसलों में लगने वाले रोग और कीट हैं। ये फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं और उत्पादकता प्रभावित करते हैं। इन रोगों और कीटों को नियंत्रण करना जरूरी है, इसी से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। दुर्गापुरा स्थित राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान के सीनियर टेक्नीकल असिस्टेंट डॉ. रिधिशंकर शर्मा और शोध छात्र कमल किशोर सैनी ने बताया कि रोगों का समय पर निदान करके उत्पादन को प्रभावित होने से रोका जा सकता है।

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