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बारिश से गेहूं, जौ चने की फसल को होगा फायदा, उत्पादकता बढ़ेगी

5 वर्ष पहले
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रोग के लक्षण : पीलीरोली के लक्षण पत्तियों की उपरी सतह पर पीले रंग की धारियां बन जाती है। कुछ दिनों के बाद इन धारियों से पीले रंग के कवक बीजाणु पाउडर के रूप में बाहर निकलने लगते हैं और हवा के साथ उड़कर रोग का प्रसार करते हैं। नमी और कम तापमान इस रोग को फैलाने में सहायक होते हैं।

क्या करें : डॉ.प्रदीप सिंह शेखावत ने बताया कि जिन किसानों ने रोली रोग ग्राह्य किस्मों का चयन किया है, उन्हें खेत का निरीक्षण करना चाहिए। रोली का प्रकोप सर्वप्रथम पेड़ की छाया के नीचे वाली फसल पर आता है। यहां रोली ग्रस्त पौधे दिखते ही इनका निदान करना चाहिए। इसके लिए टेबुकोनाजोल 25.9 प्रतिशत ईसी एक मिलीलीटर दवा या प्रोपिकानाजोल 25 प्रतिशत ईसी एक मिलीलीटर दवा एक लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर खेत में छिड़काव करना चाहिए। आवश्यकता हो तो 10 दिन के अंतराल में छिड़काव को दोहराया जा सकता है।

किसानजानकारी या उचित मार्गदर्शन के अभाव में बीजों का उपचार नहीं कर पाए तो इससे गेहूं और जौ की फसल में रोग लगने की आशंका है। इससे हालांकि नुकसान अधिक तो नहीं होगा, लेकिन आगे के लिए फसल से निकलने वाले दाने हानिकारक साबित हो सकते हैं। इससे 4 से 8 प्रतिशत का नुकसान आंका जा सकता है, लेकिन इस नुकसान के मुकाबले उपचार का खर्च मात्र दो सौ रुपए ही होता है। इस बीच राज्य में जैसलमेर और बाड़मेर जिले को छोड़कर लगभग सभी स्थानों पर बारिश हुई है। इससे गेहूं, चने और जौ की फसल को जबर्दस्त फायदा होने की संभावना है। इससे किसानों को एक अतिरिक्त पिवाई नहीं करनी पड़ेगी। इस बारिश के कारण राज्य में उत्पादकता भी बढ़ेगी। कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हुई, इससे आगेती फसल में नुकसान से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन कुल मिलाकर फायदा ही फायदा है।

गेहूं और जौ के बीजजनित रोगों, खासतौर से गेहूं से अनावृत कंडवा और पत्ती कंडवा तथा जौ के अनावृत और अावृत कंडवा और पत्तीधारी रोगों, का निदान बीजोपचार से शतप्रतिशत संभव है। अगर किसानों ने विधि अनुसार बीजोपचार नहीं किया है तो उससे रोग लगना तय माना जा सकता है। दुर्गापुरा स्थित राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान के सहायक प्रोफेसर (पादप रोग) डॉ. प्रदीप सिंह शेखावत ने हाल में जयपुर सहित आसपास के जिलों में कई खेतों में जाकर स्थिति का मौके पर अ‌वलोकन किया है। इसमें कई खेतों में रोगग्रस्त फसल सामने आई है। इसमें किसानों से बातचीत में सामने आया कि जानकारी के अभाव में बिना उपचार किए ही बीजों की बुआई कर दी। इसका असर अब देखने में रहा है।

भूरी रोली

पीली रोली

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