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कानून का रोचक तोड़: पुलिस ने चंबल बजरी से भरे वाहन जब्त करने शुरू किए तो गधों से कराने लगे निकासी

4 वर्ष पहले
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सुप्रीमकोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस ने बजरी खनन के खिलाफ कार्रवाई शुरू की तो इसका तोड़ बजरी माफियाओं ने निकाल लिया। गधों से बजरी खनन का तोड़ भी ऐसा है कि पुलिस मूल दर्शक बन गई है। चाह कर भी कार्रवाई नहीं कर पा रही है। गधा कहना भले ही किसी की समझदारी पर सवाल उठाना हो सकता है, लेकिन शहर में गधे कुछ इस कदर समझदारी से काम कर रहे हैं जो प्रशासन की समझ से भी बाहर है। गत दिनों पुलिस द्वारा अवैध चंबल बजरी के खिलाफ की गई कई कार्रवाई के बाद भले ही कुछ दिन तक शहर में चंबल रेता से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और ट्रकों के पहिए थम गए हो, लेकिन चंबल बजरी माफिया ने भी अब चंबल बजरी खनन का नया रास्ता निकाल लिया है। ऐसे में पुलिस चाह कर भी कार्रवाई नहीं कर पाएगी। जी हां, चंबल बजरी माफिया द्वारा शहर में इन दिनों गधों से चंबल बजरी की निकासी की जा रही है। शहर के इलाकों में सुबह से ही दर्जनों गधों की पीठ पर चंबल रेता लेकर जाते हुए लोगों को आसानी से देखा जा सकता है। नाम छापने की शर्त पर एक व्यक्ति ने बताया कि ट्रैक्टर-ट्रॉली और ट्रकों से चंबल बजरी की निकासी की जाती है तो पुलिस कार्रवाई कर ट्रैक्टर-ट्रॉली और ट्रकों को जब्त कर लेती है और वाहन को थाने ले जाती है। इसके चलते अब गधों से चंबल बजरी का दोहन शुरू किया जा रहा है। क्योंकि पुलिस अगर कार्रवाई करती है तो मालिक मौके से फरार हो जाएंगे, वहीं गधों को पुलिस जब्त करने के लिए सोंचेगी और उन्हें जब्त नहीं करेगी। क्योंकि गधे अगर थाने में जाएंगे तो वे चिल्लाएंगे और गंदगी करेंगे। ऐसे में शायद यह सोच पुलिस कार्रवाई करे। इसलिए गधों से चंबल बजरी की निकासी की जा रही है।

एकट्रॉली बराबर 24 गधे, एक गधा बजरी 100 रुपए की

एकट्रैक्टर-ट्रॉली में जितनी चंबल बजरी आती है। उतनी ही करीब 24 गधों में बजरी आती है। एक ट्रैक्टर-ट्रॉली की कीमत 24 सौ रुपए के करीब है। वहीं माफिया एक गधे की पीठ पर लदे चंबल बजरी की कीमत 100 रुपए ले रहे हैं। ऐसे में ग्रुप के साथ लोग दर्जनों गधों की पीठ पर चंबल बजरी लादकर लोगों को एक ट्रॉली के पैसे ले रहे हैं।

शहरमें सुबह और शाम को हो रही गधों से बजरी निकासी

शहरमें सुबह और शाम को धड़ल्ले से गधों की पीठ पर चंबल बजरी की निकासी की जा रही है। इलाके के लोगों ने बताया कि कुछ माह पहले सुबह और शाम को चंबल बजरी से भरी कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियां रोजाना निकलती थी। लेकिन पुलिस ने कड़ाई दिखाई तो चंबल बजरी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दिखनी ही बंद हो गई। वहीं अब कुछ दिनों से सुबह से ही गधों का झुंड दिखाई देता है, जिनकी पीठ पर चंबल बजरी लदी हुई होती है।

^अभी तक पूरा ध्यान बजरी माफिया पर था। जो ट्रैक्टर-ट्रॉली और ट्रकों के माध्यम से चंबल बजरी की निकासी करते थे। वो अब उन्होंने पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। अगर अब वे गधों द्वारा चंबल बजरी की निकासी कर रहे हैं तो इस मामले को दिखवाकर कार्रवाई की जाएगी। सतीशकुमार यादव, सीओ सिटी, धौलपुर

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