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हाईकोर्ट ने फिर दोहराया खेल मैदानों के हालात दयनीय, नहीं हों गैर खेल गतिविधियां

4 वर्ष पहले
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हाईकोर्टने फिर से दोहराया है कि प्रदेश में खेल मैदानों के हालात दयनीय हैं और ये हालात सुधारने के लिए स्पोर्ट्स काउंसिल क्या कर रही है। वहीं अदालत ने खेल मैदानों में गैर खेल गतिविधियां आयोजित नहीं करने के लिए कहा है। यह निर्देश न्यायाधीश जेके रांका ने शुक्रवार को प्रदेश में क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों का विकास नहीं होने और लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को हर खेल संघ पर लागू करने के मामले में लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान मामले में फैसला सुरक्षित रखते हुए दिए। अदालत ने कहा कि रामपाल की ओर से दायर याचिका निस्तारित हो चुकी है और इस मामले में किसी प्रार्थना पत्र को स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि कोई पीड़ित है तो वह अलग से याचिका दायर कर सकता है। सुनवाई के दौरान स्पोर्ट्स काउंसिल सचिव, विधि सचिव जेडीसी सहित अन्य अफसर पेश हुए। पक्षकारों ने कहा कि खेल के मैदानों में केवल खेल ही हाे और 15 अगस्त 26 जनवरी के कार्यक्रमों को छोड़कर गैर खेल गतिविधियां नहीं होनी चाहिए।

आरसीएने कहा-लोकपाल एथिक्स ऑफिसर को नहीं हटाया, पुराने आदेश को रिकॉल करें : सुनवाईके दौरान आरसीए अध्यक्ष सीपी जोशी की ओर से एक प्रार्थना पत्र पेश कर कहा कि उन्होंने लोकपाल जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्रा एथिक्स ऑफिसर जस्टिस पानाचंद जैन को उनके पदों से नहीं हटाया है। इसकी जानकारी उन्हें 25 जुलाई को दे दी जाएगी। इसलिए अदालत 14 जुलाई के आदेश को रिकॉल करे। अदालत ने इस प्रार्थना पत्र पर भी सुनवाई लंबित रख ली। गौरतलब है कि 14 जुलाई को आरसीए के कोषाध्यक्ष पिंकेश जैन ने अदालत में प्रार्थना पत्र पेश कर कहा था कि कार्यकारी सचिव महेन्द्र नाहर ने पिछले दिनों लोकपाल जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्रा एथिक्स अॅाफिसर जस्टिस पानाचंद जैन को उनके पदों से कार्यमुक्त कर दिया है। एेसा करना गलत है और अवमानना है। इस पर अदालत ने दोनों को उनके पद पर बने रहने का निर्देश देते हुए प्रार्थी को छूट दी कि वह चाहे तो नाहर के खिलाफ अवमानना कार्रवाई करने के लिए उसे पक्षकार बना सकता है।

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