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बिना चीरफाड़ वाली तकनीक से होगा हार्ट के मरीजों का इलाज

6 वर्ष पहले
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हृदयकी बीमारी से पीड़ित मरीजों को एंजियोप्लास्टी, स्टंटिंग तथा बाईपास सर्जरी नहीं होने की स्थिति में इलाज के लिए निराश नहीं होना पड़ेगा। मेडिकल शिक्षा विभाग ने एसएमएस अस्पताल में पायलट प्रोजेक्ट के तहत बिना चीर-फाड़ वाली इन्हेंस्ड एक्सटर्नल काउंटर पल्सेशन (ईई-सीपी) तकनीक से इलाज की तैयारी शुरू कर दी है।

एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. यू.एस.अग्रवाल ने बताया कि हार्ट के साथ कैंसर, लिवर एवं गुर्दे की गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए ईई-सीपी तकनीक एक विकल्प की तरह काम करेगी। विशेषज्ञों की ओर से जारी रिपोर्ट में सकारात्मक परिणाम मिले हैं।

क्या है ईई-सीपी

यहनॉन-सर्जिकल तकनीक है। इसमें मरीज को मशीन पर लिटाकर जांघ, पिंडलियों पर प्रेशर कप बांधे जाते हैं। ये नीचे से ऊपर तक फूलते रहते हैं। मरीज की सिटिंग 35 दिन निर्धारित है। विभिन्न प्रोसेस के जरिए हार्ट की मांसपेशियों का हृदय प्रवाह पुन: चालू हो जाता है और मरीज की एंजाइना की शिकायत खत्म हो जाती है।

^एसएमएस अस्पताल में ईई-सीपी तकनीक शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री एडवायजरी काउंसिल के सदस्यों की बैठक में निर्णय लिया गया है। अस्पताल में सफल प्रयोग के बाद मेडिकल कॉलेज से जुड़े तथा 300 से अधिक बिस्तरों वाले जिला अस्पतालों में पीपीपी मोड पर शुरू किया जाना प्रस्तावित है। राजेन्द्रराठौड़, चिकित्सा मंत्री