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स्टाफ की कमी से जूझ रहे पांचों कृषि विश्वविद्यालय

6 वर्ष पहले
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कृषि विश्वविद्यालयों एक नजर

विश्वविद्यालयस्वीकृत पद कार्यरत पद खाली पद कुलपति

स्वामी केशवानंद कृषि विवि बीकानेर 519 369 150 डॉ. बी.आर. छीपा

म.प्र.कृषि एवं कृषि प्रौद्योगिकी विवि उदयपुर 1160 810 350 डॉ. पी.के. दशोरा (प्रभार)

कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर 1062 690 372 अतिरिक्त प्रभार

कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर 369 131 238 अतिरिक्त प्रभार

कृषि विश्वविद्यालय, कोटा 406 205 201 संभागीय आयुक्त

पॉलिटिकल रिपोर्टर | जयपुर

प्रदेशमें नवाचार करने के लिए पांच कृषि विश्वविद्यालय खोले गए, लेकिन राज्य सरकार की बेरुखी के चलते अब ये कृषि विश्वविद्यालय महज दिखावे के रह गए हैं। इन पांचों विश्वविद्यालयों में 1311 पद खाली पड़े हैं। दो साल से 5 में से चार विश्वविद्यालय कार्यवाहक कुलपतियों के भरोसे चल रहे हैं। कुलसचिव का पद भी तीन कृषि विश्वविद्यालयों बीकानेर, उदयपुर और जोबनेर में लंबे समय से खाली पड़ा है। इन विश्वविद्यालयों में स्टाफ ही नहीं है तो रिसर्च कैसे हो पाएगा।

पांचों विश्वविद्यालयों में कुल 3516 पद स्वीकृत हैं। इसमें सभी वर्ग के पद शामिल हैं। इनमें से 2205 पद पर ही कर्मचारी कार्यरत हैं, बाकी 1311 पदों पर अभी नियुक्तियां या पदस्थापन होना है। प्रदेश की सबसे पुरानी मानी जाने वाली बीकानेर कृषि विश्वविद्यालय में लगभग 28 फीसदी शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक पद पिछले पांच साल से खाली हैं। स्टाफ की कमी सबसे अधिक जोधपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय में हैं, यहां 65 फीसदी पद खाली पड़े है। इन पांचों विश्वविद्यालयों के अधीन 16 कॉलेज आते हैं। दुर्गापुरा स्थित संस्थान सहित अन्य कॉलेजों में खाली पदों के कारण अनुसंधान में काफी दुविधा हो रही है। प्रोफेसरों को आउटसोर्सिंग के तहत अन्य कॉलेजों में पढ़ाने के लिए जाना पड़ रहा है।

राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों ने विभिन्न फसलों की 400 से अधिक किस्में और 500 कृषि तकनीक विकसित की है। अब स्टाफ की कमी के चलते फसलों में आने वाली सामान्य सी नई बीमारियों के लिए भी शोध के काम नहीं हो रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण सूत्र कृमि का प्रकोप है, जिसके लिए अभी तक इस पर शोध के लिए प्रोफेसर की नियुक्ति तक नहीं हो पाई है। अनुसंधान के लिए पर्याप्त फंड भी नहीं मिल पा रहा है।

पेंशनका भी संकट

कृषिविश्वविद्यालयों से रिटायर हुए वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के पिछले 10 माह से पेंशन ही नहीं मिल पा रही है। नियमानुसार पेंशन का भुगतान पेंशन फंड से दिया जाना चाहिए, जो समाप्त हो गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और राज्य सरकार की ओर से इसमें सहयोग नहीं दिया जा रहा है, इससे दिक्कतें पेश रही है। कार्मिकों को पेंशन का काम राज्य सरकार हाथ में ले तो समाधान हो।

^पिछलीसरकार ने आनन फानन में विश्वविद्यालय तो घोषित कर दिए, लेकिन बाकी व्यवस्थाएं नहीं की। अब वाइस चांसलर जल्द लगा रहे हैं। वित्तीय स्वीकृति मिलते ही बाकी पदों को भी भरेंगे। इन विश्वविद्यालयों को संगठित, मजबूत और आत्मनिर्भर बनाएंगे। -प्रभुलालसैनी, कृषि मंत्री, राजस्थान।