वेटिंग रेल टिकट को कंफर्म बनाने की जुगाड़
रेलयात्रा करनी है, पर टिकट कंफर्म नहीं है। हर जगह वेटिंग दिख रही है। ऐसे में टिकट की जुगाड़ कैसे हो? यह सवाल अक्सर सामने आता है। लेकिन दो चचेरे भाइयों ने इसका समाधान सुझाया है। एक आईआईटी का छात्र है और दूसरा एनआईटी का। दोनों ने मिलकर ‘टिकट जुगाड़’ एप बनाया है, जो कंफर्म टिकट के वैकल्पिक रास्ते बताता है।
आईआईटी खड़गपुर में सेकंड ईयर के छात्र रुनाल जाजू का कहना है कि उन्हें महाराष्ट्र के औरंगाबाद स्थित घर जाने के लिए नियमित यात्रा करनी पड़ती है। एक बार उन्हें वेटिंग टिकट मिला, लेकिन ट्रेन में चढ़ा तो कई सीटें खाली थी। तब टेक्नोलॉजी के जरिए समस्या का समाधान करने की ठानी। चचेरे भाई और एनआईटी जमशेदपुर में पढ़ रहे शुभम बलदेवा की मदद ली। उसने कोडिंग की और यह एप सामने गया। आईआईटी की उद्यमिता सेल ने इस ऐप को सपोर्ट किया। जाजू के इस स्टार्टअप को आईआईटी खड़गपुर के ग्लोबल बिजनेस मॉडल कम्पीटिशन में 1.5 लाख रुपए का पहला पुरस्कार भी मिला। फिलहाल यह ऐप सिर्फ एंड्रायड पर है। एक महीने में पांच हजार से ज्यादा डाउनलोड हो चुके हैं। अब वे साइट के साथ ही एपल के आईओएस ऑपरेटिंग सिस्टम पर भी लाना चाहते हैं।
सर्विस चार्ज भी नहीं..
जाजूका कहना है कि कुछ टिकट एजेंट्स एक्सपर्ट होते हैं। उन्हें हर स्टेशन का कोटा रटा हुआ होता है। वे कंफर्म टिकट भी दिला देते हैं, लेकिन भारी-भरकम फीस भी वसूलते हैं। इसके मुकाबले यह एप फ्री में डाउनलोड किया जा सकता है। सर्विसेस के लिए भी पैसे नहीं लगते। विज्ञापन भी नहीं हैं। टिकट बुकिंग का लाइसेंस लेने की तैयारी में हैं, ताकि खर्च निकाल सके।
ऐसे काम करता है
हरस्टेशन पर ट्रेन के लिए टिकट का निश्चित कोटा होता है। यानी आपको यात्रा ‘ए’ स्टेशन से शुरू करनी है। लेकिन वहां कोटा फुल है। एक भी टिकट कंफर्म नहीं है। ऐसे में यह ऐप ट्रेन के रूट पर ‘ए’ स्टेशन से पहले या बाद का वह स्टेशन तलाशता है, जहां कोटा खाली पड़ा है। तब आप इसी ऐप पर क्लीयरट्रिप टिकट एजेंसी की मदद से कंफर्म टिकट बुक करा सकते हैं।
शुभम बलदेवा और रुनाल जाजू