सरकारी अस्पतालों में 1 अप्रैल से लगाए जाएंगे पोलियो के निशुल्क इंजेक्शन
राज्यके सरकारी अस्पतालों में 1 अप्रैल से बच्चों को एक हजार रु. कीमत का इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन (आईपीवी) निशुल्क लगेगा। यह मांसपेशियों में लगाया जाने वाला इंजेक्टेबल टीका है। इसमें निष्क्रिय या मृत वायरस होता है, जो वातावरण में किसी तरह की प्रतिरोधक क्षमता पैदा नहीं करता। जिसके लगेगा, उसके ही असर करेगा। यह 14 सप्ताह की उम्र में ओवीपी की तीसरी डोज के साथ लगाया जाएगा।
चिकित्सा विभाग के प्रोजेक्ट डाइरेक्टर (इम्यूनाइजेशन) डॉ.एसके गर्ग ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) के तहत पोलियो को जड़ से खत्म करने के लिए एक अतिरिक्त खुराक दी जाएगी। केन्द्र सरकार की ओर से प्रथम चरण में आईवीपी की शुरुआत असम, गुजरात, पंजाब, बिहार, मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में हो चुकी है। अधिकारियों कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के बाद तैयारी कर ली गई है। केन्द्र सरकार के निर्देशानुसार, दूसरे चरण में राजस्थान में संभावित तिथि 1 अप्रैल निर्धारित की गई है। इधर, औषधि नियंत्रण संगठन के आदेशानुसार 25 अप्रैल के बाद ट्राइवेलेंट ओपीवी (वाइल्ड पोलियो वायरस 1, 2 एवं 3) बंद हो जाएगा। अब सिर्फ बाइवेलेंट (वाइल्ड पोलियो वायरस 1 एवं 3) लगेगा। ड्रग कंट्रोलर अशोक भंडारी ने बताया कि औषधि नियंत्रण अधिकारियों को ट्राइवेलेंट ओपीवी के निर्माण बिक्री पर रोक लगाने के लिए मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं।
आईपीवी से बच्चा सुरक्षित
आरसीएचओप्रथम डॉ.रोमेल सिंह ने बताया कि वाइल्ड पोलियो वायरस पर नियंत्रण तथा प्रतिरोधक क्षमता बरकरार रखने के लिए आईपीवी लगाया जा रहा है। पोलियो की खुराक जन्म होने पर दी जाती है, लेकिन पेंटावेलेंट वैक्सीन बच्चों को डेढ़, ढ़ाई और साढ़े तीन माह पर लगाया जाता है। इसके साथ ही ओरल पोलियो वैक्सीन की पहली, दूसरी और तीसरी खुराक दी जाती है। तीसरे खुराक यानी साढ़े तीन माह पर इंजेक्शन लगेगा। चरणबद्व तरीके से ओपीवी के टाइप-2 घटक को हटाया जाएगा।
ओपीवी: मुंहसे दी जाने वाली खुराक है तथा इसमें जीवित वायरस उपस्थित होता है। वातावरण में उपस्थित कीटाणु जंगली (वाइल्ड) वायरस को हटाने की क्षमता रखता है। पहली दूसरी डीपीटी डोज के साथ ओपीवी लगाया जाता है।