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खेल के माध्यम से भी किसी को लाया जा सकता है सही राह पर

6 वर्ष पहले
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कुछ मिनट के लिए कल्पना करें कि शाहरुख खान बॉलीवुड सितारे नहीं हैं और पश्चिम बंगाल के सेवानिवृत्त बैंकर अशोक दत्त से मिलते हैं तो वे एक-दूसरे को अपना परिचय कैसे देंगे? अपना नाम बताकर शाहरुख कहेंगे, ‘हेलो, मैं आईपीएल क्रिकेट टीम कोलकाता नाइट राइडर्स का ओनर हूं’ और अशोक दत्त कहेंगे, ‘हेलो, मैं पीएफएल फुटबॉल टीम सुचित्रा 7 का ओनर हूं।’ कुछ इस तरह ये दो टीमों के ओनर एक-दूसरे को परिचय देंगे।

आप और हमें अशोक दत्त को जानने का कोई जरिया नहीं है, क्योंकि वे हमारे-आपके जैसे ही विशुद्ध मध्यमवर्गीय व्यक्ति हैं- पढ़ाई-नौकरी-शादी-बचत-सेवानिवृत्ति। उनकी जिंदगी तब उलट-पुलट हो गई जब उनकी जीवनसंगिनी सुचित्रा उन्हें छोड़कर चली गईं। अब उनके सामने जीवन का नया उद्‌देश्य था कि दिवंगत प|ी की याद में कुछ किया जाए। उन्होंने फुटबॉल टीम खरीद ली और प|ी के नाम पर टीम को नाम दिया। कोलकाता में चल रहे मौजूदा पीएफएल मैचों (पदातिक फुटबॉल लीग) मंे टीम चार मैच खेल चुकी है और धीरे-धीरे जीत की ओर बढ़ रही है। आपको अचरज होगा कि मध्य वर्ग का बैंकर किसी फुटबॉल टीम का ओनर कैसे बन सकता है, क्योंकि टीम खरीदने के लिए तो बहुत पैसा लगता है? इसका रहस्य जानने के लिए कुछ इंतजार कीजिए! इससे बड़ी बात तो यह है कि दत्त अकेले नहीं है। ऐसी 16 टीमें हैं, जिनके ओनर विशुद्ध रूप से ऐसे मध्यवर्गीय हैं, जो आज भी बड़ी किफायत से पैसा खर्च करते हैं।

शाहरुख खान, अभिषेक बच्चन जैसे बॉलीवुड सितारों और सौरव गांगुली जैसे क्रिकेट सितारों ने भारत में पेशेवर खेल टीमों के ओनर बनकर चाहे इसकी शुरुआत क्यों की हो, लेकिन शायद उन्हें पता हो कि उन्होंने समाज में कैसा शुभ चलन शुरू कर दिया है। परोक्ष रूप से उन्होंने 16 नई फुटबॉल टीमेंं शुरू कर दी हैं जैसे- बसिरहाट, सोनागाछी, रामबागान-सेथबागान, जोराबागान, दमदम, दोमजुर, किद्‌दीपोर, कालीघाट, बऊबाजार, टीटागढ़, सिओराफुली, बारुइपुर अौर दुर्गापुर। और ज्यादातर टीमंे बंगाल की सेक्स वर्करों के बच्चों की हैं। कोलकाता के नागरिक ऐेसी 16 टीमों को प्रायोजित करने के लिए अागे आए हैं, जो पीएफएल का हिस्सा हैं। प्रत्येक टीम 7000 रुपए में बिकी है। जीतने वाली टीम के लिए 10,000 रुपए की मामूली इनामी राशि है। बारह टीमें संबंधित रेडलाइट एरिया के नाम पर हैं। तीन टीमों में मिश्रित सदस्यता हैं। जहां अामलासोले आदिवासी बच्चों की टीम है तो कैदियों के बच्चों, गलियों में बढ़ने वाले और नशे के आदी बच्चों की दो टीमें बनी हैं- दोस्ती-1 और दोस्ती-2। फिर एक टीम है दरबार स्पोर्ट्स अकादमी की।

पांच वर्षों से इन टीमों के मैच आयोजित हो रहे हैं, किंतु टीमों के स्वामित्व की अवधारणा पहली बार लाई गई है अौर बेशक प्रेरणा शाहरुख खान ही हैं, जो कोलकाता की आईपीएल टीम के ओनर हैं। इसी तरह अशोक दत्त 7 हजार रुपए देकर ‘दम दम’ टीम के ओनर बने और उसे नया नाम दिया ‘सुचित्रा 7।’ मौजूदा लीग में रविवार तक 20 मैच खेले जा चुके हैं और फाइनल 3 मार्च 2016 को होगा। दर्शकों की औसत मौजूदगी 250 इससे ज्यादा रही है, जिससे इन बच्चों को समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का अहसास हो रहा है। अाम लोगों का मैच देखने आना समाज के नज़रिये में सकारात्मक बदलाव का संकेत है। वरना अब तक तो उन्हें ऐसे देखा जाता रहा है, जैसे उन्होंने कोई अपराध किया हो, जबकि बात इतनी ही है कि वे ऐसे पालकों की संताने हैं, जिन्होंने जिंदगी में जाने किस मजबूरी के कारण गलत मोड़ ले लिया।

चीअर लीडर्स में टीम के ओनर का परिवार मित्र, गलत राह पर चलने के बाद सही दिशा लेने वाले पालक, खिलाड़ियों के दोस्त और वे लोग जिन्हें सारी कहानी पता है। कल्पना में उन माताओं की अांखों की चमक देखें,जो किसी को फोन पर गर्व के साथ बताती हैं, ‘मैं फुटबॉल का मैच देख रही हूं, जिसमें मेरा बेटा खेल रहा है।’ नतीजा चाहे जो हों, खुशी के आंसू इन मैचों में कभी नहीं रुकते, क्योंकि चीअरलीडर्स, जो पालक रिश्तेदार हैं, उनके पास भी अपने परिवार के बारे में समाज को गर्व से कुछ बताने के लिए होता है (जिसे उनके बच्चों ने हासिल किया है)।

फंडायह है कि खेलउन लोगों की मदद करने और मुख्यधारा में वापस लाने का प्रभावी जरिया हो सकता है, जिन्होंने जिंदगी में कभी गलत मोड़ ले लिया था। raghu@dbcorp.in

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