स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ेगा जीडीपी खर्च
भारतमेंजीडीपी का केवल चार प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च होता है जबकि चीन में यह 5.7 प्रतिशत है। यूएसए में तो जीडीपी का 17.5 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च होता है। यह कहना है सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम के राज्य मंत्री गिरीराज सिंह का। गिरीराज सिंह निम्स हॉस्पिटल में आयोजित पीडियाट्रिक गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी, हेपेटोबिलेरी, ट्रांसप्लांट एंड न्यूट्रीशियन की इंटरनेशनल कॉन्फ्रंेस में शनिवार को बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार चिकित्सा सेवाओं को काफी बढ़ावा दे रही है और आने वाले समय में काफी सुविधाएं आमजन को मिलने लगेंगी। उन्होंने सरकार की इंद्रधनुष योजना सहित अन्य योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अंगदान को केवल महादान कह औपचारिकताएं पूरी कर ली जाती हैं लेकिन हकीकत यह है कि समाज का एक बड़ा वर्ग अंगदान करने से बचता है। यदि अंगदान हों तो हजारों लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। हजारों मरीज ऐसे होते हैं, यदि उनके अंग ट्रांसप्लांट किए जाएं तो उन्हें लंबे समय तक दवा लेने से और मरने से बचाया जा सकता है।
इसी दौरान निम्स यूनिवर्सिटी के डॉ. एएस सोइन, डॉ. नीलम मोहन ने बच्चों में होने वाले मेटाबॉलिक लिवर में हो रहे लिवर ट्रांसप्लांट और उनकी चुनौतियों के बारे में जानकारी दी। केडवेर डोनर को बढ़ावा देकर मरीजों की जिंदगी बचाई जा सकती है। डॉ. अशोक गुप्ता ने बच्चों की रेयर डिजीज के बारे में जानकारी दी। साथ ही बच्चों में लिवर ट्रांसप्लांट की संभावनाएं और ट्रांसप्लांट की जानकारी दी। इजिप्ट के डॉ सालेम और डॉ. नसेफ ने गेहूं की एलर्जी के बारे में विस्तृत जानकारी दी और बताया कि यह एक पाचन रोग है जो कि छोटी आंत को नुकसान पहुंचाता है।
डॉ. अनुराग तोमर ने कहा कि सीलिएक रोग उन्हें होता है जो बच्चे गेहूं, राई, जौ के ग्लूटेन नामक प्रोटीन को बर्दाशत नहीं कर पाते। इस दौरान डॉक्टर्स ने बच्चों में कब्ज, दस्त आदि बीमारियों के बारे में बताया। स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने इंटरनेशनल कॉन्फ्रंेस के लिए बधाई दी।