अपने फैसलों पर शक हो या पाना हो स्टाफ का भरोसा तो ये तरकीबें
क्या आप एक बार फैसला कर लेने के बाद बार-बार उस पर विचार करते हैं या इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि फैसला सही किया या नहीं। हालांकि संशय की स्थिति से तो सभी को कभी कभी गुजरना पड़ता है, लेकिन अगर अक्सर ऐसा होता है तो यह लीडरशिप क्षमता को प्रभावित कर सकता है। इससे दूसरों के मन में आपके प्रति गलत धारणा भी बनती है। अगर अपने किसी फैसले पर भरोसा नहीं हो रहा है तो इस इन्ट्यूशन पर ध्यान देना चाहिए। हाल ही में किए अपने किसी फैसले पर विचार करके इसे समझा जा सकता है। उम्मीद है कि पाएंगे कि इंन्ट्यूशन या मन से आई अावाज सही दिशा में ले जा रही थी। यहां तक कि जब गलती हुई तब भी संकेत मिले थे, जिसे रोका भी जा सकता था। फैसलों पर संशय की स्थिति से निकलने का एक तरीका और है कि फैसले की समीक्षा की सुनिश्चित योजना बनाई जाए। तय समय बाद अपने फैसले की समीक्षा की जाना चाहिए।
(केरोलेनहारा के ‘स्टॉप सेकेंड-गेसिंग योन डिसिजन एट वर्क’ से)
बॉस को अपने ही किए फैसलों पर संदेह रहता हो तो क्या करें? या कर्मचारियों का भरपूर सहयोग या विश्वास पाना हो तो यहां दिए जा रहे कुछ उपाय उपयोगी हो सकते हैं। साथ ही जानिए स्टाफ में नॉलेज शेयरिंग बढ़ाने के तरीके - हार्वर्डबिजनेस रिव्यू से-