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मनुष्य की याददाश्त हैक करने में जुटे हैं वैज्ञानिक

5 वर्ष पहले
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हॉलीवुड फिल्म ‘एटरनल सनशाइन ऑफ स्पॉटलेस माइंड’ और इन्सेप्शन में दिखाया गया था कि इंसान के दिमाग की याददाश्त (मैमोरी) को हटाना, बदलना यहां तक कि प्रत्यारोपण भी किया जा सकता है। अब वैज्ञानिक भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने भी कह दिया है कि ऐसा करना असंभव नहीं है। अभी इस दिशा में प्रयोग किए जाने शेष हैं। अमेरिकी टीवी कार्यक्रम ‘नोवा’ के हाल के एपिसोड में भविष्य की सच होने वाली संभावनाओं के बारे में बताया गया है। इसी के साथ वैज्ञानिकों ने कहा कि वे ऐसा करने की कोशिशों में जुटे हैं।

वैज्ञानिक कह चुके हैं कि मनुष्य की याददाश्त में बदलाव करना बहुत जटिल काम है, लेकिन अब वे यह जानने में जुटे हैं कि याददाश्त का कौन-सा हिस्सा सक्रिय रहता है, वह संकेतों को पाकर किस तरह काम करता है। खासतौर पर वह कौन-सा कारण होता है, जिसमें दिमाग एक पल में ही वर्षों पुरानी बातें सामने ले आता है। कई बार यह भी याद नहीं रहता कि बीते दिन हमने कब कौन-सा काम किया था। नोवा के एपिसोड में 12 वर्षीय जेक ह्यूस्लर का उल्लेख किया गया, जिसमें हाल ही में हाइली सुपीरियर ऑटोबायोग्राफिकल मैमोरी (एचएसएएम) की पहचान की गई है। वह छोटा-सा है और तुरंत ही अपना पूरा बीता समय क्रमवार सामने रख देता है।

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