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झारखंड में यमुना की पहल से बची 3 हजार हेक्टेयर की हरियाली

5 वर्ष पहले
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राजा पाठक| जमशेदपुर/चाकुलिया

झारखंडका गांव चाकुलिया। जमशेदपुर से 60 किमी दूर जंगलों में बसे इस गांव में लोग लगातार पेड़ काट रहे थे। गांव में आई नई बहू यमुना टुडू से यह देखा नहीं गया। तीर-धनुष लेकर घर से बाहर कदम रखा। गांव में वन सुरक्षा समिति बनाई और जंगल हरियाली बचाने में जुट गईं। यह उनकी मेहनत का नतीजा था कि गांव में तीन हजार हेक्टेयर में जंगल लहलहा रहा है। इस अभियान में वे अब तक 80 गांव की हजारों महिलाअों को जोड़ चुकी हैं। ये सभी महिलाएं गांव में पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधती हैं।

यमुना की शादी 1998 में चाकुलिया के मानसिंह टुडू से हुई। शादी के बाद पति का भी पूरा साथ मिला। यमुना ने कहा, उनका गांव वीरान था। पिता गांव में हरियाली लाना चाहते थे। वे अपनी खेत की मेढ़ों पर पौधे लगाया करते थे। फिर उसकी देखरेख भी करते थे। वह भी पिता का हाथ बंटाती थी। पिता से ही उन्हें जंगल बचाने की प्रेरणा मिली। पर्यावरण संरक्षण वनों की सुरक्षा के लिए 22 जनवरी को राष्ट्रपति भवन में उन्हें सम्मानित किया गया। इसके अलावा केंद्र और राज्य स्तर पर कई पुरस्कार उन्हें मिल चुके हैं। 2013 में दिल्ली विश्वविद्यालय की एक टीम ने उन पर एक डाक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाई।

जसवंत सिंह विर्क| छिंदवाड़ा | मध्यप्रदेशके किशनलाल उइके भले आज नहीं रहे, लेकिन उन्होंने पथरीली और बेजार पहाड़ी को हरा-भरा कर पर्यटन स्थल बना कर एक मिसाल कायम की है। 19 साल पहले गांव उमरियाइसरा से लगी पथरीली पहाड़ी पर कुछ पेड़ ही नजर आते थे। वह भी जलाऊ लकड़ी के लिए काटे जा रहे थे। उस समय किशनलाल ने लोगों को समझाकर पेड़ों की कटाई रोकी। फिर पहाड़ी पर कुछ पौधे लगाए। समस्या थी पौधों को सींचने के लिए पानी की। पानी, बैलगाड़ी से पहाड़ी पर पहुंचाया। एक-दो साल में उसकी मेहनत हरियाली के रूप में दिखने लगी। तब अन्य ग्रामीण और वन महकमा भी उसके साथ हो गया। वन विभाग ने पौधे उपलब्ध कराए और वन ग्राम समिति का गठन किया। पानी की कमी दूर करने तीन साल बाद पहाड़ी के नीचे जलाशय का निर्माण किया। करीब आठ साल बाद लगभग 700 एकड़ की पथरीली पहाड़ी हरे भरे घने जंगल में तब्दील हो गई।

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