राजशाही का रहस्य
बीकानेरके शासकों को मुगल बादशाहों की तरफ से फरमान, निशान और मंसूर लिखे जाते थे। मुगलकाल बीतने के बाद यह व्यवस्था तो खत्म हो गई लेकिन वे मूल्यवान फरमान आज भी बीकानेर पूर्व राजघराने के पास सुरक्षित हैं, जिन्हें आजादी के बाद पहली बार बाहर लाया जाएगा।
पूर्व बीकानेर स्टेट के 93 फरमान हैं, जिनका शोधकर्ताओं को बेसब्री से इंतजार है। इतिहास की पुस्तकों में झांकने से केवल फरमान का उल्लेख ही मिलता है लेकिन असल में उसमें लिखा क्या था, उसे जानने और समझने के साथ ही शोध करने की जिज्ञासा लोगों में बनी हुई है। राज्य अभिलेखागार ने हाल ही में जयपुर स्टेट के फरमानों का तीसरा वॉल्यूम जारी किया है। ठीक उसी तर्ज पर बीकानेर पूर्व राजघराने ने भी अपने फरमान सार्वजनिक करने की तैयारी शुरू कर दी है। फारसी में लिखे इन फरमानों के लिए अनुवादक तलाशे जा रहे हैं। दरअसल स्टेट मर्ज होने के बाद सन 1761 से पूर्व के यह फरमान राजपरिवार के पास ही रह गए थे,जो उनकी निजी सम्पत्ति बन गए। अभिलेखागार को बाद में कुछ फरमानों की केवल फोटो प्रतियां ही उपलब्ध कराई गईं थीं।
आगे क्या | इतिहासकारडॉ. शिव कुमार भनोत बताते हैं कि बीकानेर की स्थापना सन विक्रम संवत 1545 वैशाख सुदी 1488 ई. में हुई थी। उस वक्त सुल्तानों का काल था। दिल्ली में लोदी वंश का शासन था। 1526 में बाबर ने भारत पहुंचकर मुगल साम्राज्य की स्थापना की। फरमानों का सिलसिला 1566 से शुरू हुआ जब अकबर गद्दी नशीन हुए। उसके बाद जहांगीर, शहजादा और औरंगजेब के समय तक फरमान चले थे। यह फरमान ऐसे शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं जो उच्च स्तर की रिसर्च करते हैं।
^ स्टेट मर्ज होने के बाद यह फरमान राजपरिवार के पास ही रह गए थे। जीर्णशीर्ण होने के कारण नेशनल आर्काइव्ज से इनका केमिकल ट्रीटमेंट कराया गया है। जयपुर स्टेट की तरह इनके भी फरमान तैयार कराए जाएंगे। इसके लिए अंग्रेजी हिंदी के अनुवादक तलाश रहे हैं। -दिलीप सिंह,कॉर्डिनेटर,महाराजा गंगा सिंह ट्रस्ट
^ मुगलकालीन 280 फरमानों के तीन वॉल्यूम जयपुर स्टेट के जारी हुए हैं। इसी प्रकार जोधपुर और सिरोही स्टेट के फरमानों पर भी काम चल रहा है। बीकानेर स्टेट के फरमान हमें नहीं दिए गए। यदि राजपरिवार चाहेगा तो विभाग सहयोग देने को तैयार है। डॉ.महेन्द्र खडग़ावत, निदेशक,राज्य अभिलेखागार
औरंगजेब पुत्र ने लिखा था राजा रामसिंह को निशान
“राजाराम सिंह, बादशाही अमीस कृपा से शक्ति सम्पन्न एवं प्रसन्नचित्त होकर अवगत हो कि आपके सेवगी और निष्कपट आस्था पुराने समय से पुश्त दर पुश्त हमारे पूर्वजों के साथ चली रही है। आपकी सत्य निष्ठा, स्वामी भक्ति आपके बाप-दादा की भांति हमारे दिल पर स्पष्ट रूप से अंकित है। इसके अतिरिक्त आलमगीर का व्यवहार जो हिंदुओं के प्रति है वह आपको ज्ञात है। अत: कुंवर किशन सिंह की घटना में जो सामने आया वह यद्यपि यौवन के फलस्वरूप था किंतु यह भी आलमगीर के पक्षपात के कारण हुआ, जैसा कि वह हर प्रकार से इन लोगों के साथ करता है।’ औरंगजेब के पुत्र शाहजादा मुहम्मद अकबर ने जयपुर राज्य के तत्कालीन शासक राजा राम सिंह को 22 मई 1682 को यह निशान लिखा। इतिहासकारों की नजर में इस घटना के मायने हैं। यह फरमान हाल ही में जारी तीसरे वॉल्यूम में दर्ज हैं। फारसी भाषा के इन फरमानों का हिंदी अनुवाद डॉ. शजाउद्दीन ने किया है।