इंडोनेशिया : सबसे ज्यादा महिला काजी
निकाह में ठगी जा रही थीं इसलिए बनाई महिला काजी
इधर, दारुल उलूम ने कहा- महिलाएं काजी भी बन सकती हैं और मुफ्ती भी
जयपुर की महिलाओं के काजी बनने को देवबंद से समर्थन
सहारनपुर| विश्वविख्यातइस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम देवबंद ने कहा है कि इस्लाम धर्म मुस्लिम महिलाओं के काजी बनने के खिलाफ नहीं है।
संस्था के जनसंपर्क अधिकारी अशरफ उस्मानी ने राजस्थान के जयपुर की दो महिलाओं जहांआरा और अफरोज बेगम के काजी बनने का समर्थन किया। उस्मानी ने कहा, ‘इस्लाम में मुस्लिम महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने एवं विद्वान होने का पूरा हक प्राप्त है। इस्लाम में महिला काजी बन सकती है और मुफ्ती भी। वे काजी पद की सभी जिम्मेदारियों का पूरी तरह से निर्वहन कर सकती हैं। कुछ शर्तें हैं, जो भारत में लागू नहीं हैं। मुफ्ती का कोर्स करने वाली मुस्लिम औरतें शरई मामलों में फतवे भी दे सकती है।’ उन्होंने दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी की ओर से बयान दिया।
अफरोज
जहां आरा
यहां करीब 100 महिला काजी। महिला काजियों की सबसे ज्यादा संख्या इंडोनेशिया में ही है।
फलस्तीन: फलस्तीनअथॉरिटी ने 2009 में वेस्ट बैंक में दो महिलाओं को काजी बनने की मंजूरी दी।
मलेशिया: 2010में मलेशिया में दो महिलाओं को काजी बनने की अनुमति मिली। हालांकि आपराधिक या तलाक के मामलों में इनका दखल नहीं है।
...और भारत में स्थिति यह
दिसंबर,2003 में शबनम आरा बेगम को प. बंगाल के पूर्वी मिदनापुर जिले के नंदीग्राम गांव में महिला काजी के रूप में नियुक्त किया गया था। वे भारत की पहली महिला काजी हैं। अब तक वे 700 से ज्यादा निकाह पढ़वा चुकी हैं। हालांकि उन्होंने अपना काम सिर्फ निकाह पढ़वाने तक ही सीमित रखा है।
तलाक और आपराधिक मामलों में दखल या शरीयत से जुड़ी सलाह वे नहीं देतीं।
दिव्य मराठी नेटवर्क | मुंबई/जयपुर
निकाहमें होने वाली धोखाधड़ी रोकने के लिए ही दारुल उलूम निस्वान द्वारा महिलाओं को काजी बनाने की ट्रेनिंग शुरू की गई है। इसका उद्देश्य पुरुष काजियों या इस्लामी शरीअत को चुनौती देना नहीं है। यह कहना है भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन के तहत मुंबई स्थित दारुल उलूम निस्वान के पदाधिकारियों का। जयपुर की जिन दो महिलाओं ने प्रदेश की पहली महिला काजी होने का दावा किया था, भास्कर ने अपने पाठकों को सबसे पहले उनसे रूबरू कराया था। चार दरवाजा निवासी जहां आरा और बासबदनपुरा निवासी अफरोज बेगम मुंबई के दारुल उलूम निस्वान से काजी बनने ट्रेनिंग लेकर आई थीं। मंगलवार को दैनिक भास्कर समूह के दिव्य मराठी की टीम ट्रेनिंग स्थल पर पहुंची। मुंबई में भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन संगठन की राष्ट्रीय सचिव डॉ. नूरजहां सफिया नियाज ने बताया कि उनके संगठन ने बीते साल मुस्लिम महिलाओं का देशव्यापी सर्वेक्षण कराया था। शेष| पेज 4
इसमेंकाजी के जरिये महिलाओं को फंसाने के मामले उजागर हुए थे। सही बात छिपाकर काजी कई बार निकाह करवा देते हैं। ऐसे में तय किया गया कि महिला काजी होने पर यह फंसाने वाले मामले रुकेंगे। इसी के मद्देनजर 2007 में दारुल उलूम निस्वान नाम के एक उप संगठन की स्थापना की गई। इसी के जरिये मुस्लिम महिलाओं को काजी प्रशिक्षण देने की शुरुआत की गई। यह संगठन तलाक, निरक्षरता, समान हक के लिए कार्य कर रहा है। नूरजहां ने बताया कि महिला काजी बनाने के लिए दिए जाने वाले प्रशिक्षण में हम बताते हैं कि शरीअत कानून क्या है, निकाह के संदर्भ में कुरआन क्या कहता है, इस्लाम में महिलाओं का स्थान क्या है।