रेलणी पूरी पर खाद का पता नहीं
पुलिस थाने में खाद का वितरण
शाहपुरा. रेलणीपूरी हो गई पर किसानों को खाद नहीं मिल पा रहा है। खाद के लिए किसान क्रय-विक्रय सहकारी समिति के चक्कर लगा रहे हैं। किसानों का कहना है कि रेलणी के सात दिन बाद खाद की जरूरत होती है। ऐसे में खाद नहीं मिला तो फसल बर्बाद हो जाएगी। एक माह से खाद का संकट बना हुआ है। किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। अफसरों को ज्ञापन दे रहे लेकिन सुनवाई नहीं हो पा रही है। कृषि विभाग के अधिकारी संतोषजनक जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं।
किसानों का कहना है कि क्षेत्र के नाहर सागर, उम्मेदसागर अरवड़ बांध की नहरों को बंद कर दिया गया। रेलणी हो चुकी लेकिन खाद का पता नहीं है। इधर समिति संचालकों व्यवस्थापकों की मानें तो रबी की बुवाई से पहले समितियों को फास्फोरस खाद की सप्लाई दे दी गई। यह खाद इतना पड़ा है कि गोदामों में जगह नहीं है। इस खाद की अभी मांग भी नहीं है। कुछ संचालकों का कहना है कि समितियों में पुराना बकाया होने से क्रय-विक्रय सहकारी समितियों ने यूरिया खाद की समय पर मांग नहीं भेजी। इससे भी समस्या रही है। क्रय-विक्रय सहकारी समिति के लेखाकार सुनील जैन ने बताया कि मांग समय पर कर दी गई लेकिन कंपनी से खाद की उपलब्धता नहीं होने तथा समय पर आवंटन नहीं होने से खाद समस्या रही है। एक-दो दिन में खाद आने पर सप्लाई शुरू कर दी जाएगी।
खाद के साथ अन्य उर्वरक देने पर प्रदर्शन
सवाईपुर. सहकारीसमिति पर मंगलवार को खाद का ट्रक पहुंचने से पहले बड़ी संख्या में किसान पहुंच गए। समिति संचालक को अग्रिम राशि देकर बिल कटवा लिए। जब खाद वितरण की बारी आई तो किसान उखड़ गए। किसानों का आरोप था कि खाद के बैग के साथ अन्य उर्वरक थमा दिया गया। इस बात को लेकर किसानों ने समिति के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसानों का आरोप था कि जो उर्वरक दिया गया वह पुराना है। इसके 45 रुपए अतिरिक्त वसूले गए। मामला बढ़ने पर समिति संचालक ने अन्य उर्वरक का वितरण रोक दिया। इसी बीच भीड़ ज्यादा होने खाद के बैग कम होने से किसान आपस में उलझ गए। प्रत्येक किसान को एक-एक बैग देने पर मामला शांत हुआ।
अब तक पहुंचा 16 मैट्रिक टन खाद
उम्मेदसागरनाहर सागर बांध क्षेत्र में 16-16 हजार बीघा भूमि सिंचित है। अरवड़ बांध में 28 हजार बीघा भूमि सिंचित है। क्षेत्र में 60 फीसदी बुवाई हो चुकी है। इस लिहाज से 60 मैट्रिक टन खाद की जरूरत है