- Hindi News
- घासीपुरा में चमड़ा ठेकों का रिकॉर्ड ही नहीं
घासीपुरा में चमड़ा ठेकों का रिकॉर्ड ही नहीं
ग्रामपंचायत घासीपुरा में दो वर्षों से मृत पशुओं की चमड़ी का ठेका लगातार मनोहरपुर के एक ठेकेदार को दिया जा रहा है, लेकिन चमड़ा ठेका छोड़ने के दौरान जिस प्रक्रिया को अपनाना चाहिए तो उसको अपनाया जा रहा है और ही इसका पंचायत रिकॉर्ड में कोई इंद्राज किया जा रहा। इससे पंचायत के पास दो वर्षों में दिए गए ठेकों का कोई रिकाॅर्ड नहीं है।
ग्राम पंचायतों में निजी आय बढ़ाने के लिए नियमानुसार कोरम की बैठक में ठेके छोड़ने का प्रस्ताव लेकर चस्पा कर ठेका प्रक्रिया अपनाकर चमड़े के ठेके छोड़े जाते हैं। इसके तहत घासीपुरा पंचायत में भी दो वर्षों से प्रतिवर्ष चमड़ा ठेका मनोहरपुर के एक ठेकेदार सत्तार खां को दिया जा रहा है, किंतु ठेका देने के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया का पंचायत रिकार्ड में कोई इंद्राज नहीं किया जाता। यहां तक कि पंचायत सचिव को भी इस बात की जानकारी नहीं है कि ठेका किसके छोड़ा गया है छोड़ने के दौरान क्या प्रक्रिया अपनाई गई। उप सरपंच पति कैलाश यादव ने बताया कि पंचायत ने गत वर्ष का ठेका मार्च-अप्रैल में 5500 रुपए में मनोहरपुर के सत्तार खां के छोड़ा था जिसका रिकाॅर्ड भी पंचायत में उपलब्ध नहीं है और ही ठेके की राशि आज तक पंचायत में जमा की गई।
ठेका छोड़ने के दौरान कौन-कौन ठेकेदार पंचायत में आए किसने क्या मूल्य भरा किसी को कुछ नहीं मालूम। इसी प्रकार वर्ष 2041 का ठेका भी 10 हजार रुपए में पंचायत ने सत्तार खां को अप्रैल में छोड़ दिया गया, जबकि सरपंच 9 सितंबर को ठेका छोड़ने की बात कह रहे हैं। सरपंच 10 हजार रुपए में ठेका छोड़ने की बात तो कर रहे हैं, किंतु 10 हजार रुपए की राशि जो ठेका छोड़ने के दौरान प्राप्त हुई है, उसका इंद्राज सचिव ने रिकाॅर्ड में नहीं कराया है। इससे नाराज ग्रामीणों ने पंचायत पर कोरम को बिना बताए गुपचुप में ठेके छोड़ने का आरोप लगाते हुए ठेके की एवज में प्राप्त राशि का गबन करने का आरोप लगाया है।
बैठक का नहीं है प्रस्ताव
ग्रामीणोंने बताया कि पंचायत सरपंच सचिव ने ठेके छोड़ने के दौरान ग्राम पंचायत की बैठक में कोई प्रस्ताव नहीं लिया कि ठेका किसके कितने रुपए में छोड़ा जा रहा है।
किसीको कुछ मालूम नहीं
पंचायतसचिव आफताब का कहना है कि उनको रिकाॅर्ड के आधार पर यह नहीं मालूम कि गत वर्ष ठेका किसके कितने रुपए में छोड़ा गया था। उनको गत वर्ष के ठेके की राशि भी प्राप्त नहीं हु