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समर्पण के लिए भक्ति जरूरी: आचार्य रामदयाल

7 वर्ष पहले
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रामस्नेहीसंप्रदाय के पीठाधीश्वर जगदगुरु आचार्यश्री रामदयालजी महाराज ने कहा कि राम राष्ट्र के लिए समर्पण अनिवार्य है। समर्पण के लिए भक्ति चाहिए। सत्ता धर्मध्वजा के समन्वय से ही आंतकवाद से छुटकारा पाया जा सकता है। भारतीय सनातन संस्कृति और महाप्रभु रामचरणजी महाराज के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए आचार्यश्री ने कहा कि किसी भी धर्म या मजहब की निंदा करना नरक में जाने के समान है।

आचार्यश्री सोमवार को रामनिवास धाम की बारादरी में अहमदाबाद के शांतिलाल कोठारी की अगुवाई में पेश किए गए विशेष चढ़ावा समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि रामस्नेही संप्रदाय अपने उदेश्यों के अनुरूप मानव सेवा, गोसेवा, चिकित्सा शिक्षा सेवा सहित अन्य कई पुनीत कार्य कर रहा है। संप्रदाय के आद्याचार्य का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि रामधर्म को छोड़ कर कोई भागे नहीं।

शाहपुरा की धरा को तपोस्थली बताते हुए आचार्यश्री ने कहा कि यहां की माटी ललाट पर लगाने वाला धन्य हो जाता है। उन्होंने कहा कि संसद से लेकर सड़क तक व्याप्त आंतकवाद की काली छाया के कोहरे को हटाने के लिए राम नाम स्मरण जरूरी है। ऐसा किए बिना भवसागर की वैतरणी पार करना कठिन है। हमारा सनातन धर्म विश्व में मानवता का संदेश दे रहा है। मिथ्या से अहंकार का भाव पैदा होता है। इससे कौरवों तक का सफाया हो गया।

धर्मसभा को भंडारी संतश्री जगवल्लभराम, शांतिलाल कोठारी अहमदाबाद ने भी संबोधित किया। इससे पूर्व शांतिलाल कोठारी की अगुवाई में चढ़ावे की शोभायात्रा प्रांरभ हुई जो मुख्यद्वार, सूजपोल होते हुए रामनिवास धाम की बारादरी पहुंची। शोभायात्रा में शामिल भक्तजन श्रीराम का जयघोष करते हुए चल रहे थे। बारादरी पहुंचते ही भक्तों की ओर से गादी की आरती वंदना कर आचार्यश्री का अभिनंदन किया गया।

तेजामेला आज

रोपां.कोठाजमें मंगलवार को वीर तेजाजी महाराज का मेजा आयोजित होगा। सुबह तेजाजी थानक पर विशेष पूजा अर्चना के बाद गांव में जोत निकाली जाएगी। सोमवार को भजन संध्या का आयोजन हुआ।

दर्शनको उमड़े भक्त

सांगरिया.नवरात्रमें धनोप माता मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। सोमवार तड़के आरती दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। रोजाना यहां पदयात्रियों के जत्थे पहुंच रहे हैं।