भीलवाड़ा। लगभग 20 साल बाद शाहपुरा में फिर से स्वतंत्र कृषि उपज मंडी बनाई जाएगी। अभी वहां भीलवाड़ा कृषि उपज मंडी के अधीन गौण मंडी है।कृषि विभाग के शासन उप सचिव हरिशंकर शर्मा ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। राज्य सरकार ने भीलवाड़ा मंडी के क्षेत्र में शाहपुरा बनेड़ा तहसील को अलग कर दिया है। पंचायत समिति शाहपुरा में 38 तथा बनेड़ा में 26 ग्राम पंचायतें हैं। इन्हें मिला शाहपुरा में स्वतंत्र मंडी समिति बनाई जाएगी। इसके आशय की घोषणा कर दी। मंडी सचिव फूलचंद मीणा ने बताया कि विभाग ने 24 सितंबर तक आपत्तियां एवं सुझाव मांगे हैं। कोई भी व्यक्ति कृषि विभाग, कृषि उपज मंडी, प्रशासन के पास आपत्तियां एवं सुझाव दे सकते हैं।
भीलवाड़ा का क्षेत्र घटेगा : भीलवाड़ामंडी के अधीन अभी कोटड़ी, शाहपुरा, बनेड़ा आसींद गौण मंडी हैं। मांडल करेड़ा का क्षेत्र भी इसी में आता है। शाहपुरा बनेड़ा टूट कर अलग होने से भीलवाड़ा का क्षेत्र घटेगा।
अब क्यों बना रहे मंडी
- शाहपुरा मंडी ने 1 अगस्त 2014 से 31 अगस्त 2014 तक 48 लाख रुपए मंडी शुल्क कमाया। गोदाम किराए आदि अलग है।
- विधानसभाअध्यक्ष कैलाश मेघवाल का निर्वाचन क्षेत्र है। उन्होंने प्रबल पैरवी की।
किसे-क्या होगा फायदा : किसान:अभी उपज बेचने भीलवाड़ा या केकड़ी ले जाते हैं या सस्ते भाव में स्थानीय व्यापारियों को बेच देते हैं। अब शाहपुरा में नीलामी से बेचेंगे तो पूरे दाम मिलेंगे। कृषक साथी सहित विभिन्न योजनाओं के लाभ भी शाहपुरा में ही मिल जाएंगे।
व्यापारी:शाहपुरामें कारोबार बढ़ेगा। अभी अधिकतर किसान बाहर ले जाते हैं। व्यापारियों के लाइसेंस आदि काम वहीं होंगे।
सरकार:क्षेत्रके अधिकतर व्यापारी मंडी फीस नहीं चुकाते। प्रभावी मॉनिटरिंग से इस पर अंकुश लगेगा। सरकार की आय बढ़ेगी।
कृषि विभाग ने जारी की अधिसूचना, 24 तक मांगी आपत्तियां
1978 में स्थापना 94 में टूटी मंडी : शाहपुरा सब यार्ड प्रभारी डालचंद खटीक का कहना है कि मंडी की स्थापना लगभग 38 साल पहले 1978 में हुई थी। कुछ साल यह ठीकठाक चली। धीरे-धीरे आय घटती गई। राज्य सरकार ने एक अगस्त 1994 को मंडी को तोड़ भीलवाड़ा मंडी का सब यार्ड बना दिया गया। तब शाहपुरा की सालाना आय 6-7 लाख रुपए थी।
(शाहपुरा. गौणमंडी में माल की तुलाई करते पल्लेदार।)