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कोर्स शुरू हुआ नहीं, दो साल से व्याख्याता ठाले

7 वर्ष पहले
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जयपुरजिले में चिमनपुरा कालाडेरा में दो बीएड कॉलेज खुलने हंै। दोनों ही स्थानोंं में बन रहे बीएड कॉलेज का दो साल में भी नेशनल कौंसिल ऑफ टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) के अनुरूप भवन नहीं बन पाए हैं। चिमनपुरा बीएड कॉलेज को पहली किस्त के रूप में मिले 50 लाख रुपए की राशि से तैयार भवन को एनसीटीई ने बिना कारण बताए ही अभी तक मान्यता नहीं दी, लेकिन राज्य सरकार की ओर से कॉलेज में व्याख्याताओं की नियुक्ति कर दी गई। ऐसे में जहां तैयार भवन वर्तमान में अनुपयोगी साबित हो रहा है, वहीं विद्यार्थियों के अभाव में व्याख्याता दो साल से वेतन उठा रहे हैं। इससे बीएड में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को अभी अौर इंतजार करना पड़ेगा।

तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सत्र 2012 में चिमनपुरा कॉलेज परिसर में अलग से बीएड कॉलेज खोलने की स्वीकृति दी थी। सरकार ने इस कार्य के लिए प्रथम किस्त के रूप से 50 लाख रुपए भी जारी कर दिए थे और सार्वजनिक निर्माण विभाग को कार्यकारी एजेंसी बनाया गया था। एजेंसी ने ग्राउंड फ्लोर का कार्य किया, लेकिन दो साल बाद भी यह कार्य पूर्ण नहीं हुआ और वर्तमान में एक कमरे का कार्य अभी भी जारी है।

राज्य सरकार ने जुलाई 2012 में बीएड कॉलेज के लिए सात व्याख्याताओं की नियुक्ति भी कर दी थी, लेकिन सरकार ने प्राचार्य अन्य स्टाफ की नियुक्ति नहीं की, जबकि एनसीटीई के अनुरूप अलग से प्राचार्य स्टाफ होना चाहिए। इसके बाद एनसीटीई ने इस कॉलेज का निरीक्षण किया, लेकिन निरीक्षण के बाद से अभी तक तो मान्यता मिली और ही कोई जवाब आया।

इसी प्रकार बीएड कॉलेज के लिए दूसरी किस्त के रूप में आने वाली 75 लाख की राशि भी जारी नहीं की। ऐसे में भवन का पूर्ण निर्माण होने में अभी और समय लगेगा। इधर कॉलेज प्रशासन फर्नीचर, लाइब्रेरी, कम्प्यूटर सहित अन्य सामान स्वीकृत राशि से क्रय कर चुका है।

भूमि भी कर दी स्वीकृत

सुप्रीमकोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार 1500 वर्ग मीटर में कॉलेज परिसर होना चाहिए। चिमनपुरा कॉलेज ने भी बीएड कॉलेज के लिए 7500 हजार वर्गगज भूमि समर्पित कर दी है।

दो मंजिला बनेगा भवन

सार्वजनिकनिर्माण विभाग के अनुसार बीएड कॉलेज के लिए अलग से दो मंजिला भवन का निर्माण होगा। भवन निर्माण के लिए द्वितीय किस्त के लिए 75 लाख रुपए स्वीकृत हुए, लेकिन वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलने से टेंडर निरस्त हो गए थे। अब वापस रा