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डॉक्टरों ने क्वार्टरों को किराये पर चढ़ाया

7 वर्ष पहले
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कस्बेके लालबहादुर शास्त्री मेमोरियल राजकीय चिकित्सालय में सन् 2006 में स्वास्थ्यकर्मियों के लिए आवास बनाए गए, ताकि जनता को त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सके। अफसोस कि इन सरकारी आवासों में मात्र तीन स्वास्थ्य कर्मचारी ही रह रहे है जबकि अन्य क्वार्टरों को आवंटित कार्मिकों ने किराये पर उठा रखा है। ऐसे में आठ साल पहले चिकित्सा कर्मियों के ठहराव के लिए बने सरकारी क्वार्टरों का उचित सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। मजेदार बात तो यह है कि डॉक्टर सरकारी आवास के बजाय अस्पताल के आसपास किराये से आवास लेकर वहां प्रैक्टिस कर मरीजों से मोटी रकम वसूल रहे है।

सरकारी अस्पताल के चिकित्साकर्मियों के लिए सन् 2006 में हाइवे पर वन विभाग कार्यालय के समीप क्वार्टरों का निर्माण कराया गया था। विभाग ने डॉक्टरों के ठहराव के लिए 9 क्वार्टर बनाकर विधायक राव राजेंद्रसिंह से उद्‌घाटन भी कराया था। तब लोगों को उम्मीद बंधी थी कि क्वार्टर मिलने से चिकित्सकों का यहां ठहराव होगा, लेकिन क्वार्टर बनने के बाद भी चिकित्साकर्मियों का ठहराव नहीं हुआ। हालांकि कागजों में चिकित्सकर्मियों के नाम से क्वार्टर अलॉट है, मगर निवास के रूप में चंद चिकित्साकर्मियों को छोड़ दिया जाए तो अन्य सभी कार्मिक यहां नहीं रहते है। ऐसे लोगों ने अपने नाम से अलॉट सरकारी क्वार्टरों को नियम विपरीत किराये पर उठा रखा है।

ये है नियम

नियमानुसारराजकीय कर्मचारी का मूल वेतन का 10 फीसदी मकान का किराया भत्ता मिलता है। मगर जिनके नाम क्वार्टर अलॉट हो जाता है, उनको किराया भत्ता नहीं मिलता है।

शिकायतपर नोटिस दे दिया है

^क्वार्टरोंको किराये पर देना गलत है। अलॉट क्वार्टर वाले स्टाफ से शपथ पत्र ले रखा है। शिकायत मिलने पर संबंधित अलॉटी को नोटिस दे दिया है। जवाब मिलते ही कार्रवाई की जाएगी। -डॉ.आनंदीलालअग्रवाल, चिकित्साप्रभारी

शाहपुरा. तमियामें बने चिकित्सा विभाग के क्वार्टर।