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अपने दम पर ही स्टूडेंट्स जीत रहे हैं मेडल
सेठमुरलीधर मानसिंहका गर्ल्स कॉलेज में 13 साल और एमएलवी कॉलेज में 18 साल से स्पोर्ट्स टीचर नहीं है, इसके बावजूद दोनों कॉलेजों के खिलाड़ी अपने दम पर मेहनत करके गोल्ड, सिल्वर ब्रॉन्ज मेडल जीत रहे हैं।
इस साल एमएलवी कॉलेज के खिलाड़ियों ने अंतर महाविद्यालयी एथलेटिक प्रतियोगिताओं में तीन गोल्ड दो कांस्य पदक जीते हैं। इंटर कॉलेज टूर्नामेंट में वॉलीबॉल टीम के तीन स्टूडेंट का नेशनल टूर्नामेंट के लिए चयन हुआ है। वहीं बास्केटबॉल फुटबॉल में भी कॉलेज की उपविजेता रही है। इस साल गर्ल्स कॉलेज को भी एथलेटिक में दो सिल्वर दो कांस्य पदक मिले हैं। वर्ष 2012 2013 में दोनों कॉलेज के खिलाड़ियों ने विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताओं में 26 गोल्ड, 10 सिल्वर और तीन कांस्य पदक जीते थे। कई खिलाड़ी नेशनल टूर्नामेंट के लिए चयनित हुए हैं। स्टूडेंट्स अपने स्तर पर ही कड़ी मेहनत करके मेडल जीत रहे हैं।
गर्ल्स कॉलेज में ट्रैक कोर्ट नहीं
गर्ल्सकॉलेज में रेसिंग ट्रैक नहीं होने के बावजूद छात्राएं हर साल एथलेटिक में मेडल जीतती रही हैं। यहां वॉलीबॉल कोर्ट भी नहीं है फिर भी कॉलेज टीम अंतर महाविद्यालयी प्रतियोगिता में वर्ष 2008 से वर्ष 2012 तक लगातार विजेता रही है।
जिले के किसी कॉलेज में स्पोर्ट्स टीचर नहीं
एमएलवीगर्ल्स के अलावा मांडलगढ़, शाहपुरा, रायपुर आसींद कॉलेज में भी स्पोर्ट्स टीचर नहीं हैं। मांडलगढ़ शाहपुरा कॉलेज में स्पोर्ट्स टीचर थे लेकिन तीन महीने पहले ही उनका जिले से बाहर के कॉलेजों में ट्रांसफर हो गया। सभी कॉलेजों ने निदेशालय को प्रस्ताव भी भेज रखे हैं लेकिन कोई प्रोग्रेस नहीं है।
कैलाशचंद्र बैरवा, एथलीट
^मैं चाहता हूं कि स्पोर्ट्स टीचर नहीं होने का नुकसान खिलाड़ियों को नहीं हो। इसलिए मैं उन्हें मोटिवेट करता हूं। उनकी छोटी-छोटी समस्या पर ध्यान देता हूं। खिलाड़ी भी खूब मेहनत करते हैं। इसलिए हर बार गोल्ड, सिल्वर मेडल मिलते हैं। -प्रो.संतोषानंद गारू, खेलप्रभारी एवं भूगोल लेक्चरर, एमएलवी कॉलेज
^स्पोर्टसटीचर नहीं होने से छात्राओं को समस्या होती है फिर भी वे मेहनत से हर साल मेडल जीतती हैं। हम भी कोशिश करते हैं कि हमारी तरफ से उन्हें सहयोग में कोई कमी नहीं रहे। -आरपीडोलिया , खेलप्रभारी एवं कॉमर्स लेक्चरर, गर्ल्स कॉलेज
गर्ल्स कॉलेज: 3 साल 8 गोल्ड, 12 रजत
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