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आठ साल पहले नहर की सफाई करके भूला सिंचाई विभाग

4 वर्ष पहले
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पावटा | जलसंग्रहण करने के लिए एक ओर तो मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन सहित कई अभियान चलाकर जल संग्रहित करने का प्रयास कर रही है। दूसरी ओर सिंचाई विभाग की अनदेखी के कारण बांध से निकलने वाली नहर अतिक्रमण मिट्टी भराव से लुप्त होती जा रही है। करीब 40 वर्ष पूर्व आसपास के बांधों से निकलने वाली नहरों से किसान खेतों में नहर के पानी से सिंचाई का कार्य, नहाने पीने के काम लिया जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षो से आैसत बारिश होने से बांधों से निकल रही नहरे धीरे धीरे लुप्त सी हो रही है।

सिंचाई विभाग शाहपुरा के एईएन यशवीर सिंह ने बताया कि बुचारा बांध से पावटा, किडारोद भुरीभडाज की ओर रही नहरों की करीब 8 साल पहले बांध से डेढ़ किलोमीटर पक्की नहर शेष बची कच्ची नहर की मरम्मत सफाई मनरेगा के तहत करवाई गई थी। इसके पश्चात जोखिम वाले स्थान को चिह्नित करके दुरुस्तीकरण करवाया गया था। किसानों को कृषि रोजमर्रा में काम आने वाले पानी के लिए बांध से नहर निकाली गई थी, लेकिन सिंचाई विभाग प्रशासन की लापरवाही से लोगों ने अपना मार्ग सुगम बनाने के लिए नहर को मिट्टी से भर दिया।

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