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विधायकों के दबाव में तत्कालीन कलेक्टर शर्मा ने 343 करोड़ के खनिज ट्रस्ट के 10 सदस्य बदले, भाजपा अध्यक्ष, पूर्व सांसद के बेटे का नाम जोड़ा

4 वर्ष पहले
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बड़ेबजट के डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) में सदस्यों के मनोनयन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। तत्कालीन कलेक्टर महावीर प्रसाद शर्मा ने ट्रांसफर से कुछ दिनों पहले विधायकों के दबाव में तत्कालीन कलेक्टर डॉ. टीना कुमार के द्वारा ट्रस्ट में मनोनयन के लिए भेजे 15 नामों में से 10 के नाम बदल दिए। टीना कुमार की सूची में से केवल तीन सदस्यों के नाम नाम रखे और विधायकों के चहेतों के 10 नए नाम जोड़कर सूची मनोनयन के लिए राज्य सरकार को भेज दी।

नई सूची में खनिज विभाग के प्रतिनिधि का नाम ही हटा दिया। अन्य प्रतिनिधि के रूप में एडीएम (सिटी) आनंदीलाल वैष्णव का नाम हटाकर उनकी जगह भाजपा जिलाध्यक्ष दामोदर अग्रवाल और कम्यूनिटी के प्रतिनिधियों में पूर्व सांसद हेमेंद्र सिंह के पुत्र गोपाल चरण का नाम भेजा है। महावीरप्रसाद शर्मा ने जो नाम भेजे हैं उनमें से सभी विधायकों की पसंद के नाम ही हैं। ट्रस्ट में 30 जून तक 343 करोड़ रुपए जमा हो चुके हैं। बड़े बजट और उससे होने वाले काम को देखते हुए सभी विधायक अपने-अपने चहेतों के नाम ट्रस्ट में शामिल कराना चाहते हैं। पूर्व कलेक्टर डॉ. टीना कुमार ने विधायकों से चर्चा किए बगैर 15 लोगों के नाम भेज दिए थे।

विधायकों को इसकी जानकारी होते ही सभी ने कलेक्टर महावीरप्रसाद शर्मा पर नाम बदलने का दबाव बनाया। पहले तो महावीरप्रसाद शर्मा ने नाम बदलने से इनकार कर दिया लेकिन दबाव बढ़ा तो ट्रांसफर से कुछ दिनों पहले विधायकों के बताए नए नाम मनोनयन के लिए भेज दिए। विवाद के कारण 13 महीनों में ट्रस्ट में जमा हुए 343 करोड़ रुपए में से एक भी रुपया विकास कार्य के लिए खर्च नहीं हो पाया।

इस ट्रस्ट की सियासी लड़ाई की बड़ी वजह है कि बड़ा बजट और ताकत। क्योंकि इस ट्रस्ट का जितना बजट है उससे एक साल तक भीलवाड़ा यूआईटी तक चल सकती है। मतलब साफ है कि यूआईटी जितना बजट है। इस ट्रस्ट के बजट से खनन प्रभावित गांवों में सड़क, नाली, पर्यावरण संरक्षण और पेयजल का इंतजाम करने का मकसद है। लेकिन, इतना बड़ा बजट है कि मकसद ही बदलता जा रहा है। अब यह ट्रस्ट सियासी लड़ाई का कारण बन गया है। अधिकतर ताकतवर नेता इस ट्रस्ट से अपने चहेतों को शामिल करवाना चाहते हैं। क्योंकि इससे अपने क्षेत्र में विकास के काम अपनी मर्जी से मंजूर करवा पाएंगे। इससे क्षेत्र में प्रभाव जमाने की संभावना बनती है। इसके अलावा चर्चा यह भी है कि विधानसभा अध्यक्ष एवं शाहपुरा विधायक कैलाश मेघवाल डीएमएफटी में विशेष रुचि ले रहे हैं। जिला प्रशासन ने सभी विभागों से कराए जाने वाले कामों के प्रस्ताव तैयार करवाकर पिछले महीने मीटिंग बुलाई थी, लेकिन मेघवाल का दौरा निरस्त हो जाने से मीटिंग निरस्त कर दी गई। अब तक हुई सभी मीटिंग में मेघवाल शामिल हुए हैं। अब नई मीटिंग भी उन्हीं के दौरे के अनुसार ही बुलाई जाएगी।

राज्य सरकार ने खनिज एरिया के डवलपमेंट के लिए खनिज उद्यमियों पर अलग-अलग मिनरल के अनुसार टैक्स लगाया था। ट्रस्ट में 31 मई, 2016 से 30 जून, 2017 तक 343 करोड़ रुपए जमा हो चुके हैं। ट्रस्ट की पहली मीटिंग नवंबर, 2016 में हुई थी। इसके बाद तीन मीटिंगें और हो चुकी हैं लेकिन सदस्यों के मनोनयन को लेकर विवाद होने से माइनिंग एरिया में डवलपमेंट के काम नहीं हो पा रहे हैं। पहली मीटिंग में 1.80 करोड़ रुपए के पांच काम कराने के प्रस्ताव पारित किए थे, लेकिन सभी काम अटक गए। इनमें खनन से प्रभावित एरिया के लिए 50 लाख रुपए में डिजिटल एक्सरे सहित वेंटिलेटर वैन खरीदने, खनन एरिया में आने वाली पीएचसी में नई मेडिकल उपकरण खरीदने, खनन एरिया में पौधरोपण और नई सड़कें बनाने के प्रस्ताव भी आए थे लेकिन विवाद के कारण अभी तक एक भी काम नहीं हो पाया। डीएमएफटी के नोटिफिकेशन के अनुसार ट्रस्ट में मनोनीत होने वाले सदस्यों के नाम सरकार को भेजने से पहले ग्राम सभाओं से पास कराना जरूरी होता है। सूत्रों का कहना है कि जो नाम महावीरप्रसाद शर्मा की ओर से भेजे गए वे नाम ग्राम सभाओं में पारित होने के बजाय विधायकों के कहने पर भेजे हैं।

^जिन सदस्यों के नए नाम भेजे गए थे उनका भी अभी तक मनोनयन नहीं हुआ है। हमारा प्रयास है कि जल्द मीटिंग करके विकास कार्य स्वीकृत कराए जाएं। सभी संबंधित विभागों से विकास कार्यों के प्रस्ताव भी मांगे गए हैं। मुक्तानंदअग्रवाल, कलेक्टर

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