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गोशालाओं में तैयार होंगे आयुर्वेदिक उत्पाद दवाइयां

7 वर्ष पहले
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प्रदेश की करीब 250 गोशालाओं का किया गया चयन, लगाए जाएंगे प्रोजेक्ट

भास्करन्यूज | सिरोही

गोवंशके सरंक्षण और इसकी उपयोगिता को बढ़ावा देने के लिए राज्य की विभिन्न गोशालाओं में आयुर्वेदिक उत्पाद दवाइयां तैयार की जाएंगी। इसके लिए सरकार ने प्रदेश की 250 गोशालाओं को चयन किया है। जहां इसके लिए प्रोजेक्ट लगेंगे। ऐसी गोशालाओं को केंद्र सरकार की एक योजना के तहत अनुदान मिलेगा और लोन की सुविधा भी दी जाएगी। इनमें गोमूत्र, दूध, घी गोबर से से उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इस योजना से केवल गोवंश के सरंक्षण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि गोशालाएं भी आत्मनिर्भर हो सकेंगी। सरकार के निर्देश पर गोसेवा विभाग ने इसका प्लान तैयार कर लिया है। इसके लिए आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी जोधपुर पशुपालन विश्वविद्यालय बीकानेर के साथ एमओयू किया गया है। इसके बाद पूरी प्रक्रिया को इसी महीने आगे बढ़ाया जाएगा। चयनित गोशाला संचालकों को संबंधित प्रोडक्ट के लिए अगले महीने एक सप्ताह का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

येउत्पाद होंगे तैयार : इसयोजना के तहत गोशालाओं में गोबर.गोमूत्र से वर्मी कंपोस्ट,साबुन, अगरबत्ती, औषधी, शैम्पू और कागज उद्योग लगेंगे। इसके साथ ही घी दूध के लि लघु प्लांट लगाए जाएंगे। दूध को फिल्टर होने के बाद दूध दवाओं में उपयोग किया जाएगा। दवा बनाने के लिए भी प्लांट लगाएं जाएंगे।

अच्छी है योजना

^गोवंशके सरंक्षण के उद्देश्य से यह योजना अच्छी है। इससे गोशालाओं को भी फायदा होगा और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी। इसके साथ ही सरकार को गोशालाओं के अनुदान और बेसहारा गोवंश को लेकर भी स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। फतेहसिंहराव, अध्यक्ष,श्रीरामकृष्ण गोपाल प्राणी सेवा समिति, शिवगंज