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पट्टे तो जारी किए, लेकिन भूखंड अब तक नहीं दिए

7 वर्ष पहले
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शहरमेंं दादावाडी जैन मंदिर रतन बाग के पीछे स्थित भूमि को करीब 13 वर्ष पहले सरकार ने नगर पालिका को आवासीय कॉलोनी के लिए हरी झंडी दी थी। जिस पर नगरपालिका ने गाडोलिया लुहार परिवारों को निशुल्क एवं अन्य भूखंडों को लॉटरी के जरिए रियायती दर पर दिए आंवटित किया था, लेकिन पालिका प्रशासन की लापरवाही के कारण आज तक यह योजना मूर्त रूप नहीं ले पाई। ऐसे में आवासीय कॉलोनी की आवंटित भूमि पर अतिक्रमण हो गया है। इधर, पालिका प्रशासन का कहना है कि आवासीय कॉलोनी के लिए आवंटित भूमि का सर्वे करवाया जाकर अतिक्रमणों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी, लेकिन कार्रवाई कब होगी, इसका जवाब उनके पास नहीं है।

कॉलोनीभूमि का यह है मामला : राज्यसरकार की ओर से नगर पालिका को वर्ष 2001 में आवासीय कॉलोनी के लिए भूमि का आवंटन किया गया था, जिस पर नगर पालिका ने 63 भूखंड काटकर 20 गाडोलिया लुहार परिवारों को निशुल्क पट्टे देकर बसाने के साथ अन्य 43 भूखंड लॉटरी के माध्यम से रियायती दरों पर देने की योजना बनाई गई। जिस पर 19 जून 2001 को लॉटरी निकाली गई, लेकिन उसमें विभिन्न वर्ग के लॉटरी धारकों को वह आवंटित हुए भूखंड नहीं दिए गए और नहीं गाडोलिया लुहारों को निशुल्क भूखंड उपलब्ध करवाए गए। ऐसे में खाली पड़ी भूमि पर अन्य व्यक्तियों ने कब्जे कर दिए है।

आवंटितभूमि पर हो गए पक्के निर्माण : आवासीयकॉलोनी की आवंटित भूमि पर लोगों ने अवैध कब्जे कर पक्के मकान बना दिए है। दिलचस्प पहलू यह है कि उसमें बिजली पानी के कनेक्शन भी दिए गए है, जबकि बिजली-पानी का कनेक्शन लेने के लिए नगर पालिका से एनओसी लेना जरूरी होता है। यहां सवाल यह उठता है कि इन अवैध कब्जाधारियों को नगर पालिका कार्यालय से बिजली पानी कनेक्शन के लिए एनओसी जारी की गई है या फिर जलदाय विभाग बिजली वितरण निगम ने बिना एनओसी ही इन्हें कनेक्शन जारी कर दिए है।

होनी चाहिए अनियमितता की जांच

^आवासीयकॉलोनी में पट्टाधारी गाडोलिया लुहार लॉटरी के आवंटियों को 63 भूखंड दिए जाने थे, लेकिन उस भूमि पर नगरपालिका प्रशासन पार्षदों की मिलीभगत के चलते अन्य व्यक्तियों ने अवैध कब्जे कर दिए है, जबकि यह आवासीय योजना सिर्फ गरीब तबके वाले व्यक्तियों गाडोलिया लुहार परिवारों के लिए काटी गई थी। सरकार की इस महत्वाकांक्षी आवासीय योजना में जानबूझ कर अनियमिता बरत गरीबों के साथ धोखा किया गया है, जिसकी जां