पौने दो वर्ष से अटकी सीवरेज योजना
राज्यके पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्ष 2013 के बजट में शिवगंज सीवरेज योजना की घोषणा की थी। नगर पालिका की ओर से 17 जून 2013 को सीवरेज योजना की डीपीआर रिपोर्ट तैयार कर जयपुर भेजी थी। जिस पर तत्कालीन राज्य सरकार ने 7 जून 2013 को सीवरेज के लिए 86.05 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति भी जारी की थी। लेकिन, इसके बाद वित्तीय स्वीकृति के लिए योजना की फाइल को केंद्र सरकार के पास भेजी गई थी,जहां करीब पौने दो वर्ष से फाइल धूल फांक रही है।
सड़कोंकी हो सिर्फ मरम्मत : सीवरेजयोजना के लिए जमीन के भीतर बड़ी पाइप लाइन बिछाई जाएगी,जब इसका कार्य प्रारंभ होगा तो शहर की सभी सड़कों पर खुदाई कार्य होने से वह टूटना भी सुनिश्चित है। ऐसे में पुरानी सड़कों पर अगर कहीं गड्ढों बने हुए है तो उसकी मरम्मत ही करवाई जानी चाहिए। कुटुंब कॉलोनी, गोकुलवाड़ी आदि मोहल्लों में हाल ही नई सड़क बनाई गई है।
जयपुर भेजी हुई है फाइल
^सीवरेजयोजना की प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद पालिका की ओर से डीपीआर रिपोर्ट तैयार कर वित्तीय स्वीकृति के लिए पिछले बोर्ड के कार्यकाल में जयपुर भेजी है। इसके लिए जानकारी प्राप्त कर संबंधित विभाग को लिखा जाएगा। -कंचनसोलंकी, अध्यक्ष नगर पालिका ,शिवगंज
अभी भी बन रहे है बड़े नाले
^सीवरेजयोजना स्वीकृत होने के उपरांत भी नगर पालिका की ओर से डाक बंगला तहसील कार्यालय के सामने सड़क किनारे पानी निकासी के लिए नए बड़े नालों का निर्माण करवाया जा रहा है। जिस पर लाखों रुपए व्यय किए जा रहे है। जबकि सीवरेज योजना के शुरू होते ही से ये बड़े नाले अनुपयोगी हो जाएंगे। -पुखराजपरिहार, पूर्व नगर अध्यक्ष कांग्रेस शिवगंज
86.05 करोड़ की है योजना
शिवगंजके लिए स्वीकृत सीवरेज योजना को 86.05 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दिए जाने के बाद विधानसभा के चुनाव हुए, जिसमें भाजपा की सरकार चुनी गई तो हर किसी नागरिकों को यह उम्मीद जगी कि अब जल्द ही इस योजना का कार्य प्रारंभ हो जाएगा ,लेकिन एक वर्ष से अधिक समय गुजरने के बाद भी कार्य शुरू होना तो दूर की बात, अभी तक तो वित्तीय स्वीकृति भी नहीं मिली है।
योजना से यह होगा फायदा
सीवरेजयोजना के तहत शहर के सभी मोहल्लों में भूमिगत पानी निकासी के लिए बड़ी पाइप लाइन लगवाई जाएगी। जिसमें मकानों प्रतिष्ठानों के अंदर से निकलने वाला दूषित पानी बहेगा। इससे खुले नालियों बड़े नालों से राहत मिलने के साथ मच्छर अन्य कीट उत्पन्न नहीं होंगे और दुर्गन्ध मौसमी बीमारी पर अंकुश लगेगा।