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कल्चर लेने पर ही मिल रहा है यूरिया

7 वर्ष पहले
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सिकंदरा में किसानों पर दोहरी आर्थिक मार

सिकंदरा| यूरियाकी किल्लत झेल रहे किसानों को अब अधिकारियों के अधिकृत कूपन के बाद भी व्यापारी यूरिया के साथ कल्चर (दवा) खरीदने को मजबूर कर रहे हैं। इसे लेकर किसानों को यूरिया के कट्टे के साथ इसे भी साथ में खरीदना पड़ रहा है।

किसानों ने बताया कि पहले तो व्यापारियों ने यूरिया ब्लैक में बेचा। इसके बाद प्रशासन ने कृषि पर्यवेक्षक पटवारी की ओर से जारी किए जाने वाले कूपन के बाद बिना ब्लैक में यूरिया देने के आदेश दे दिए। किसानों ने बताया कि इसके बाद कूपन लाने पर व्यापारी यूरिया तो दे रहे हैं, लेकिन उसमें कमी निकालकर चक्कर लगवा रहे हैं तथा कागजी खानापूर्ति पूरी होने पर किसानों को यूरिया के साथ मजबूरन कल्चर बेचा जा रहा है। उन्होंने बताया कि व्यापारी किसानों को यूरिया के साथ जबर्दस्ती कल्चर लेने को मजबूर कर रहे हैं। इससे किसानों को कल्चर का पैसा अतिरिक्त देना पड़ रहा है, जबकि इन दिनों को किसानों को कल्चर की आवश्यकता ही नहीं है। उन्होंने बताया कि कल्चर एक दवा है जो बीज बोने के समय काम आती है, लेकिन व्यापारियों के पास इसका स्टाक होने से वे यूरिया के साथ जबर्दस्ती बेच रहे हैं। एसडीएम राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि किसान यूरिया के साथ अन्य वस्तु खरीदने के लिए पाबंद नहीं है। यदि कोई व्यापारी ऐसा कर रहा है तो कार्रवाई की जाएगी।