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एक साल बाद भी छात्राओं को नहीं मिली साइकिल की राशि

7 वर्ष पहले
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कस्बेके राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की डेढ़ सौ छात्राओं को एक वर्ष बाद भी सरकार द्वारा साइकिल के लिए स्वीकृत ढाई- ढाई हजार रुपए के चेक नहीं मिले हैं, जबकि पूरी राशि विद्यालय के बैंक खाते में पड़ी हुई है। विद्यालय प्रभारी राशि नहीं मिलने का कारण डीईओ कार्यालय से मार्गदर्शन नहीं मिलना बता रहे है। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) ने मामले से अनभिज्ञता जाहिर कर विद्यालय प्रभारी की लापरवाही बताते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस देने की बात कही है।

वर्ष 2013 में राज्य की कांग्रेस सरकार ने सरकारी विद्यालयों में नवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए साइकिल के लिए ढाई- ढाई हजार रुपए के चेक देने की घोषणा की थी। कस्बे के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाली डेढ़ सौ छात्राओं के लिए गत वर्ष 19 सितंबर 2013 को विद्यालय के बैंक खाते में तीन लाख पिचहत्तर हजार रुपए की राशि जमा करा दी गई। राशि मिलने के तुरंत बाद राज्य में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई।

विद्यालय प्रभारी ने आचार संहिता को कारण बताते हुए राशि का भुगतान नहीं किया तथा मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद भरतपुर संभाग में सरकार का दौरा कार्यक्रम में सीकरी आए मंत्री गुलाबचंद कटारिया को छात्राओं ने व्यथा बताई तथा साइकिल की राशि दिलाने की मांग की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिन डेढ़ सौ छात्राओं को यह राशि दी जानी थी, उनमें से कुछ छात्राएं तो विभिन्न कारणों के चलते विद्यालय छोड़ चुकी हैं, लेकिन साइकिल की राशि उन्हें नहीं मिल पाई। वहीं विद्यालय में अध्ययनरत छात्राएं यह राशि मिलने की उम्मीद लगाए बैठी हैं। इसके लिए विद्यालय प्रशासन डीईओ एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

क्या कहती हैं प्रधानाचार्य

विद्यालयकी कार्यवाहक प्रधानाचार्य ऊषा खंडेलवाल का कहना है कि चार वर्ष से विद्यालय में प्रधानाचार्य का पद रिक्त चल रहा है, इस राशि के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र भेज कर मार्गदर्शन मांगा जा चुका है। लेकिन आज तक कोई जबाव नहीं आया है। इस कारण यह राशि अभी तक वितरित नहीं हो पाई।

इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) बृजेंद्र सिंह कौंतेय का कहना है कि उन्हें आज तक इस संबंध में विद्यालय से कोई पत्र नहीं मिला है। जिन विद्यालयों में प्रधानाचार्य नहीं है। उनमें विद्यालय प्रबंधन