पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • पॉकेट मनी बचाकर चुनाव में खड़ी हुई कॉलेज छात्रा, प्रण लिया ‘जब तक गांव में जरूरी सुविधाएं नहीं जात

पॉकेट मनी बचाकर चुनाव में खड़ी हुई कॉलेज छात्रा, प्रण लिया-‘जब तक गांव में जरूरी सुविधाएं नहीं जातीं शादी नहीं करूंगी’

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
यूपीविधानसभा चुनाव में बड़े-बड़े दिग्गजों के बीच बीए की एक छात्रा वंदना शर्मा भी फतेहपुर सीकरी विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरी हैं। उसने पॉकेट मनी के पैसे बचाकर नॉमिनेशन कराया और घरवालों से छि‍पकर चुनाव प्रचार भी किया। भास्कर से बातचीत में वंदना ने कहा, ‘मैं जीतूं या जीतूं, लेकिन कसम खाई है कि जब तक गांव में स्कूल-मेडि‍कल स्टोर नहीं खुल जाते तब तक मैं शादी नहीं करूंगी।’

आगरा की फतेहपुर सीकरी विधानसभा क्षेत्र के किरावली तहसील के ब्लॉक अकोला के नगला ब्राह्मण की निवासी वंदना शर्मा बीए सेकेंड ईयर की स्टूडेंट हैं।वंदना के पिता रमेश शर्मा किसान हैं और भाई का प्रॉपर्टी का बिजनेस है। वंदना के गांव के आसपास गांवों में बहुत बदहाली है। गांव में अगर किसी को नमक भी चाहिए तो 8 किमी दूर जाना पड़ता है। माहौल इतना खराब है कि कोई भी महिला शाम 6 बजे के बाद घर से नहीं निकल सकती। गांव में मेडि‍कल स्टोर है और ही स्कूल।

गांव के विकास के मुद्दे को लेकर ही 2015 में प्रधान के चुनाव में वंदना की भाभी भी खड़ी हुई थी। वंदना ने भाभी के लिए गांव में घूमकर प्रचार किया। जब वोटिंग का समय आया तो गांव के दबंग प्रधान ने खुलेआम फर्जी वोटिंग कराई। आंखों के सामने फर्जी वोटिंग देख जब वंदना ने उसका विरोध किया तो प्रधान ने वंदना को सरे आम धमकी दी और कहा, \\\"मैं प्रधान हूं और मैं ही रहूंगा, कोई और कुछ नहीं कर सकता है।’ वंदना की भाभी दूसरे नंबर पर रही और महज 100 वोट से हारी। फर्जी वोट के कारण हुई हार वंदना के दिल पर लग गई और उसने लड़ने की ठान ली। उसी दिन से वंदना ने पॉकेट मनी जमा करना शुरू कर दिया और विधानसभा चुनाव तक उसके पास 40 हजार रुपए जमा हो गए। जब घरवालों को बहाना बनाकर नॉमिनेशन के लिए कलेक्ट्रेट पहुंची तो वकील ब्रजेश रावत ने भी उसकी हंसी उड़ा दी और कहा, ‘लड़की क्या करेगी चुनाव लड़ कर।’ जब वंदना पीछे पड़ गई तो वकील ने नॉमिनेशन करवाया। वंदना ने बताया, \\\'जब मैंने झूठ बोलकर चुनाव लड़ने के बारे में सोचा था, तभी डांट का पता था और जितना सोचा था उतना ही हुआ। दो दिन के बाद ही घरवाले मान गए। वंदना कहती हैं \\\'अकेली लड़की को कोई कुछ नहीं समझता है। लड़कियां शादी के बाद आसानी से निकल सकती हैं, लेकिन कुंवारी लड़कियों को आज भी घर के अंदर ही रखने की कोशिश की जाती है। मैं भी पहले नहीं निकलती थी, लेकिन मैंने सोचा कि यह सब सही कैसे होगा और बस मैंने ठान ली की कुछ करना है और यह कुप्रथा बदलनी है। मैं जीतूं या जीतूं, हर कीमत पर गांव का विकास कराऊंगी। यही नहीं जब तक गांव में सड़क-कॉलेज और डॉक्टर नहीं जाएगा तब तक शादी नहीं करूंगी।\\\'

\\\' महिलाओं को कोई बढ़ाना नहीं चाहता\\\'

वंदनाके अनुसार, लोग चाहे लड़कियों को जितना सम्मान देने और आगे बढ़ाने की बात कहते हों, पर हकीकत में कोई महिलाओं को आगे नहीं जाने देना चाहता। पहले मैं भी ऐसी सोच रखती थी की राजनीति में महिलाओं को नहीं होना चाहिए वरना सब गलत नजर से देखते हैं। मैं प्रचार के लिए लोगों के पास जाती हूं तो लोग कोई रिस्पांस नहीं देते हैं।

भास्कर ख़ास

खबरें और भी हैं...