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इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना, छह सौ साल पुराना सिरोही का महल
हरसाल 15 सितंबर को इंजीनियर्स डे मनाया जाता है। एक ऐसा दिन जब दुनिया के विकास में इंजीनियर्स के योगदान को याद किया जाता है। इस खास अवसर पर हम आपको बता रहे हैं सिरोही महल की इंजीनियरिंग से जुड़ी खास जानकारियां, जो इसे बेजोड़ बनाती है। इस महल का निर्माण छह सौ साल पहले हुआ और आज तक इसका एक पत्थर तक नहीं हिला है। महल की इंजीनियरिंग और निर्माण को लेकर दैनिक भास्कर ने पूर्व नरेश रघुवीरसिंह से खास बातचीत कर यह जानकारी जुटाई।
एक खंभे पर बना महल
करीबछह मंजिल का यह महल महज एक खंभे पर टीका है। यह खंभा आपको सामने की ओर पीले कलर में दिखाई देता है। इसी ज्वाइंट कर शेष इमारत को खड़ा किया गया है। इसकी दीवारे ऊपर की ओर थोड़ी सी बाहर की तरफ झुकती है। जो इसे भूकंप रोधी बनाती है।
झुलतीहुई छतरी
महलमें ठाकुर जी के मंदिर के ठीक सामने एक छतरी बनी हुई है। देखने में बहुत ही भव्य और सुंदर। बहुत पतले पतले चार स्तंभों पर कांच कलशों से सजी इस छतरी की विशेषता यह है कि हवा के साथ इसका ऊपरी हिस्सा हिलता है। यह इसकी तकनीकी है। इसी छतरी के नीचे सिरोही के महाराजा का राजतिलक होता था।
महल में ब्रिज के पास ही एक टैंक बना है। यह टैंक इतना बड़ा है कि इसमें महल के सभी सदस्यों और सैनिकों के लिए एक साल तक का पानी सकता है। जो साल भर में खराब नहीं होता था क्योंकि टैंक की दीवारों पर खास लेप किया गया है। जिसे व्रजलेप कहते हैं। औषधियों युक्त यह लेप पानी को एकदम सही रखता है।
महल के भीतर परिसर में एक ब्रिज बना है। यह ब्रिज महाराजा के कक्ष को मंदिर से जोड़ता है। इसकी खासियत यह है कि इसके नीचे कोई पिलर नहीं है। दरअसल, इसे दो भवनों से दबाव देकर बनाया गया है। इसके दोनों छोरों पर बने भवनों पर यह टीका हुआ है। करीब तीन हजार लोगों का वजन यह ब्रिज सहन कर सकता है।
लालसुर्खी चूने का उपयोग | महलके निर्माण में लालुसर्खी चूने का उपयोग किया गया है। इस चूने से निर्मित भवन कम से कम एक हजार साल तक ज्यों के त्यों रहते हैं। जबकि आजकल सीमेंट का प्रयोग होता है। जिसकी करीब 35 साल की गारंटी होती है। महल की छते लदाव से बनी हैं।
सिरोही. सिरणवा की पहाडिय़ों में बना शहर का राजमहल, जो अपनी भव्यता के लिए विख्यात है। फोटो| भास्कर