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भास्कर सरोकार

7 वर्ष पहले
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नदियों जैसे बहते थे नाले, झील सा लगता था तालाब

जहां पुल बना वहां कभी बहता था झरना

जो नाले कभी नदियों की तरह कल कल करते बहा करते थे। पहाड़ों पर जिनमें झरने चला करते थे और जो तालाब बांध पहली ही बारिश में छलक जाते थे। वे इस बार सूखे ही पड़े हैं। यह कोई ज्यादा पुरानी बात भी नहीं है। महज दो तीन साल पहले की ही बात है, लेकिन अब तो नालों में पानी है, ही झरने बहे हैं और ही छोटा तालाब, मानसरोवर और कालकाजी बांध में पानी आया है। सिरणवा की पहाडिय़ों में फोरलेन निर्माण के कारण पत्थरों और मलबे में यह सारा पानी रुक गया है।

इसके बावजूद अब तक तो हाईवे एथोरिटी ने कोई कार्रवाई की है और ही प्रशासन ने। कंपनी की ओर से हाईवे का काम करीब करीब अंतिम चरण में है और प्रशासन इस इंतजार में बैठा रहा कि वे लोग मलबे को हटाएंगे। मानसून सिर पर गया और अब बीतने को भी है, लेकिन नालों से पत्थर और मलबा नहीं हटाया गया। इसी का नतीजा है कि कालकाजी बांध अब तक सूखा है। दैनिक भास्कर ने इस पूरे मामले का खुलासा किया। शनिवार को भास्कर ने शहर के अनेक लोगों से बातचीत की और सैकड़ों लोगों के एसएमएस भी आए। जिसमें सामने आया कि महज दो तीन साल पहले ही यह नाला और झरना पूरे वेग से बहता था। दैनिक भास्कर की इस मुहिम के साथ अनेक शहरवासी भी जुड़े हैं। शहरवासियों ने हमे मैसेज कर बताया कि कालकाजी के लिए पुन: संघर्ष की जरुरत है और इसके लिए वे तैयार हैं।

छोटा तालाब ऐसे लगता था जैसे कोई झील हो, पहाड़ों के बीच एकदम नीले पानी से भरा तालाब हर किसी का मन मोह लेता था

वापस एकजुट होने की जरुरत

शहरके मुख्य जलस्त्रोत कालकाजी तालाब के लिए शहरवासियों को एक बार फिर से एक होने की जरुरत हैं। जब बांध फूटा तो इसके पुन: निर्माण के लिए शहर समेत आसपास गांवों के सभी लोगों ने संघर्ष किया था और बांध का ओवरफ्लो बनाने के लिए सरकार से बजट स्वीकृत करवाया था। अब फिर से लोगों को कालकाजी बांध में पानी के रास्ते खुलवाने के लिए एकजुट होना पड़ेगा, तभी कालकाजी बांध में पानी सकता है। -प्यारेमोहम्मद, शहरवासी

प्रशासन कार्रवाई करे

कालकाजीइस शहर की पहचान है। इसमें आया पानी केवल शहर के बल्कि आस पास के गांवों में भी भूजल का रिचार्ज करता है। इस बार नाले बंद हो जाने के कारण इसमें पानी नहीं आया है। व्यापार संघ इस पर चर्चा करेगा और जरुरत पड़ी तो आंदोलन भी किय