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‘देश में 75 हजार किमी यात्रा का अनुभव, रहा सकारात्मक बदलाव’

5 वर्ष पहले
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राष्ट्रसंतजैनाचार्य विमलसागर सूरिश्वर ने कहा कि देश बदलाव की ओर बढ़ रहा है और इन्हीं बदलावों की बदौलत एक दिन भारत दुनिया सिरमौर बनेगा। पूरी दुनिया को नया रास्ता दिखाएगा, लेकिन इसके लिए हम सभी को मिलकर सतत प्रयास करते रहने होंगे। वे रविवार को सिरोही प्रवास के दौरान पत्रकार वार्ता में बोल रहे थे। जब उनसे पूछा गया कि आज देश में रोजाना अनेक कथाएं, धार्मिक आयोजन, प्रवचन आदि जैसे कार्यक्रम होते हैं। अनेक साधु संत जीवन में बुराइयों को छोड़ने और बदलाव की बात कहते हैं, लेकिन क्या बदलाव रहा है। जैनाचार्य ने कहा कि अपने तपस्वी जीवन के 21 वर्षों में मैं देश में करीब 75 हजार किमी की पैदल यात्रा कर चुका हूं। अनेक गांवों और शहरों में गया हूं। बुजुर्गों से लेकर युवाओं और हर धर्म वर्ग के लोगों से मिला हूं। मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि बदलाव रहा है। सकारात्मक सोच के साथ देश का युवा बदल रहा है। जेएनयू के घटनाक्रम पर आचार्य ने कहा कि देश में बोलने की आजादी है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि हम कुछ भी बोल दें। कम से कम राष्ट्र विरोधी तो कतई नहीं और ऐसी गतिविधियों का समर्थन भी नहीं किया जाना चाहिए। जानिए, भास्कर के सवालों पर क्या बोल जैनाचार्य।

संतों की आचार संहिता

संतहमेशा से समाज को नई दिशा दिखाते रहे हैं। कुछ मामलों में संतों की आचरण पर भी सवाल उठे हैं। प्रत्येक संत के लिए नियमों की बाध्यता होती ही है। यह उस पर निर्भर करता है कि वह उस आचार संहिता का कितना पालन करता है। अब समाज भी जागरूक हो गया है। वह तय कर लेता है कि कौन संत आचार संहिता का पालन करता है और कौन नहीं।

युवाओं में सकारात्मक सोच

मेराअधिक जोर युवाओं के विकास पर है। मैं चाहता हूं कि युवा अपनी जिम्मेदारी को समझे। यह माता पिता का भी दायित्व है कि वे युवाओं को सही संस्कार दें। मै आधे से अधिक देश में घुमा हूं। मैने देखा है युवा भी बदल रहे हैं। उनमें सकारात्मक सोच का विकास हो रहा है।

देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम कुछ भी बोल दें। बोलने के नाम पर आज कुछ लोग राष्ट्रविरोधी बाते भी करने लगे हैं। इसमें हमें देखना होगा कि कोई भी ऐसी गतिविधियों को समर्थन भी कैसे दे सकता है। जेएनयू जैसा विवाद और उनको समर्थन जैसी बाते नहीं होनी चाहिए।

आचार्य ने कहा कि देश में आज अनेक समस्याएं और बुराइयां हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम उन्हें खत्म करने का प्रयास बंद कर दें। हमें सतत प्रयास करते रहना चाहिए। मिलकर बुराइयों से लड़ेंगे तो बदलाव जरूर आएगा। यह एक दिन या कुछ ही समय में नहीं होगा बल्कि हमें लगातार इस पर काम करना होगा। हर घर परिवार को इस बदलाव की जिम्मेदारी लेनी होगी।

{राष्ट्रसंत आचार्य विमलसागर सूरिश्वर ने कहा, हमें प्रयास करते रहने चाहिए, एक दिन भारत दुनिया का सिरमौर बनेगा

{देश में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर बेबाक टिप्पणी, बोले, आजादी का मतलब यह नहीं कि हम कुछ भी बोल दें

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