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‘हम धन से नहीं, मन से धनवान बनें’

5 वर्ष पहले
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कार्यक्रम में वेलेंटाइन डे पर इस रिवाज की तीखी आलोचना की

भास्करन्यूज | सिरोही

राष्ट्रीयसंत आचार्य विमलसागर सूरीश्वर ने कहा कि हमें धन से नहीं मन से धनवान बनना है, क्योंकि आगे बढ़ने का मतलब मात्र भौतिक विकास नहीं होता। वे रविवार का शहर के आदर्श नगर में विमल वाणी आयोजन समिति के तत्वावधान तथा समाजसेवी मुकेश मोदी के आतिथ्य में आयोजित सार्वजनिक सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के सम्मान की भावना सर्वोपरि है और हमेशा रहनी चाहिए, क्योंकि राष्ट्रवाद से प्रेरित देश ही प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ सकता है। आचार्य ने कहा कि राष्ट्र सम्मान की भावना से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए और अखंड राष्ट्र वाद हम सभी का संकल्प होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति अलगाव की घोतक नहीं है और सबसे महान हैं, लेकिन अंग्रेजों के शासनकाल से सिर्फ हमारी संस्कृति का पतन हुआ, बल्कि हमनें अपने पहनावे, बोल चाल और आचरण की शूचिता भी खो दी। कार्यक्रम में आचार्य को सुनने के लिए शहर समेत आसपास के सैकड़ों लोग पहुंचे, जिससे पूरा पांडाल भी खचाखच भर गया।

कार्यक्रम में सभा समाप्त होने के बाद आचार्य जैसे ही जाने लगे, तो उनसे आशीर्वाद लेने के लिए पांडाल में मौजूद लोगों में होड़ लग गई। लोगों में आचार्य से आशीर्वाद लेने के लिए उत्साह साफ झलक रहा था, तो आचार्य ने भी उन्हें खुशहाली का आशीर्वाद दिया। सभा से पूर्व कार्यक्रम में आचार्य विमलसागरसूरीश्वरजी के प्रवचनों पर आधारित पुस्तिका विमल वाणी का विमोचन मुकेश मोदी, विरेंद्र मोदी, भरत मोदी ने किया। समारोह के दौरान भजनों की प्रस्तुतियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के अंत में आयोजक परिवार की ओर से विरेंद्र मोदी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

राष्ट्र सेवा का दिलाया संकल्प

प्रवचनके दौरान आचार्य ने पांडाल में मौजूद लोगों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन के पांच वर्ष राष्ट्र के लिए समर्पित करें। राष्ट्र सेवा का संकल्प लें, उसे पूरा करें, तो निश्चित ही भारत पुन: विश्व गुरु कहलाएगा। आचार्य ने कहा कि हर धर्म प्रेम का संदेश देता है। इसलिए हमें एक होकर एक दूसरे की भाषा, धार्मिक रीति रिवाज का सम्मान करना चाहिए, ताकि देश मजबूत हो हम बंटे नहीं और एक होकर आगे बढ़े। उन्होंने मित्रता को भी परिभाषित किया तथा कहा कि मित्र, कल्याण मित्र होना चाहिए।

हमने बदल दिया प्रेम का अर्थ

कार्यक्रमके दौरान वेलेंटाइन डे पर उन्होंने इस रिवाज की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि हमने प्रेम के महान अर्थ को शारीरिकता पर लाकर छोड़ दिया है और अंग्रेजों की तमाम कुरीतियों को अपना रहे हैं। उन्होंने कटाक्ष किया कि हमें अपने देश की बलिदानी महान पुरुषों के जन्म या जयंती याद नहीं रहती। यहां तक कि अपने परिवार के लोगों से संबंधित दिन हम भूल जाते हैं, लेकिन वेलेंटाइन डे याद रहता है। इस देश की महान संस्कृति को बचाने के लिए सांस्कृतिक अवमूल्यन को रोकना होगा।

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