कॉलेज में स्टूडेंट्स ने किया पत्र वाचन
पीजी कॉलेज में संस्कृत स्नातकोत्तर परिषद के तत्वावधान में शनिवार को एमए पूवार्द्ध एवं उत्तरार्द्ध छात्रों के लिए भारतीय दर्शन में प्रमाण पत्र वाचन किया गया। कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. विनोद कुमार के अनुसार डॉ. उषा चौहान ने सभी का स्वागत करते हुए तीनों ही विषयों का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया गया। संस्कृत विभाग की डॉ. शारदा भंडारी ने कहा कि सभी काव्य शास्त्रियों के मतों में काव्य का प्रयोजन धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष रुप पुरुषार्थ चतुष्टय की प्राप्ति है। पंडित रामनारायण शास्त्री ने कहा कि भारतीय दर्शन में कुल छह प्रमाणों की सत्ता को स्वीकारते हुए प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द प्रमाण, अर्थापत्ति तथा अभाव प्रमाण को विस्तार से समझाते हुए कहा कि प्रमाणों से ही किसी भी वस्तु का सत्ता का बोध होता है। डॉ. मीना जैन ने ऋग्वेद की विभिन्न ऋचाओं में अभिव्यक्त इंद्र, अग्नि तथा वरुण आदि प्रमुख देवताओं की मूलभूत विशेषताओं को व्याख्यायित किया। केके जैन ने संस्कृत के समृद्ध नाट्य साहित्य का विशद विवेचन करते हुए संस्कृत के नाट्य वैशिष्टय को प्रस्तुत किया। सेमिनार में संस्कृत स्नातकोत्तर परिषद के चारों पदाधिकारियों एवं अधिकांश छात्रों ने पत्र वाचन किया।