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अब हर जमीन का यूनिक होगा आईडी नंबर

7 वर्ष पहले
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एकजमीन कई लोगों को बेचने, फर्जी रजिस्ट्री कराने जैसे जमीनों के फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए प्रदेश में अब हर जमीन मालिक को उसके भूखंड का ‘यूनिक प्रोपर्टी आईडिफिकेशन नंबर’ मिलेगा। रजिस्ट्री कराने पर ये नंबर भूखंड की पूरी कुंडली बता देगा, कि अब तक उस भूखंड का कितनी बार और किस-किस के बीच सौदा हुआ था। इसके साथ ही इस नंबर से जमीन की पूरी टाइटल गारंटी मिलेगी। केंद्र सरकार के नेशनल लैंड रेवेन्यू मॉर्डनाइजेशन प्रोजेक्ट (एनएल.आरएमपी) के तहत गुजरात की तर्ज पर अब इसे राजस्थान में भी लागू किया जाएगा। इसके तहत स्टाम्प एंड रजिस्टट्री, रेवेन्यू और सेटलमेंट डिपार्टमेंट एक-दूसरे से ऑनलाइन जुड़ेंगे। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पहले चरण में तीनों विभागों की 12 सदस्यीय प्रदेशस्तरीय संयुक्त टीम बनाई गई है। टीम ने प्रोजेक्ट की जानकारी लेने के लिए गुजरात का दौरा भी किया है।

प्रक्रिया शुरू, सालभर में मिलने लगेंगे नंबर

^इसप्रोजेक्ट से पूरी तरह जमीनों के फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी। राज्य, जिला और तहसील एक-दूसरे से ऑनलाइन जुड़ेंगे। स्टेट लेवल पर डाटा सेंटर होगा। इस प्रोजेक्ट में इसरो, एनआईसी, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया आदि की भी भागीदारी है। प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, सालभर में ये नंबर मिलने लगेंगे। -सुधांशुसिंह, उपमहानिरीक्षक, मुद्रांक एवं पंजीयन विभाग उदयपुर

धोखाधड़ी के मामलों पर कसेगी नकेल

>खातेदारसे भूमाफिया द्वारा कम जमीन बताकर ज्यादा जमीन की रजिस्ट्री करा लेना।

>खाली भूखंड की रजिस्ट्री करा लेते हैं और मौके पर निर्माण होता है।

>एक ही भूखंड दो-तीन लोगों को बेच दिया जाता है।

>भूखंड दिखाते कोई और हैं और रजिस्ट्री किसी और की करा देते हैं।

सर्वे के बाद तैयार होंगे डिजिटल मैप

यूनिकआईडी नंबर जारी करने से पहले पूरे प्रदेश में तीनों डिपार्टमेंट मिलकर जमीनों का सर्वे करेंगे। सर्वे में फॉरेस्ट एरिया, ग्रीन बेल्ट, नदी-तालाब पेटा तथा धार्मिक स्थल की जमीन पर बने मकानों का पता लगेगा। रेजिडेंशियल, कमर्शियल, इंडस्ट्रीयल भूखंड का डिजिटल मैप तैयार कर कंप्यूटराइज्ड रिकॉर्ड रखा जाएगा।

सैटेलाइट से लेंगे जमीनों की एरियल फोटोग्राफ

मौकेपर जमीनों की स्थिति का पता लगाने के लिए मॉडर्न टेक्नोलॉजी उपयोग में ली जाएगी। रजिस्ट्री करने से पहले हाई रेज