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कालकाजी ही नहीं, निडोरा दुधिया भी बदहाल

7 वर्ष पहले
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कालकाजीकी तरह ही शहर के दो और तालाब बदहाल हैं। फोरलेन निर्माण के बाद इनमें पानी नहीं आया है और ये पानी को तरस रहे हैं। बहरहाल प्रशासन को भले ही अब तक ये बदहाली नजर आई हो, लेकिन शहर के जागरुक नागरिकों ने इस स्थिति के बारे में दैनिक भास्कर को अवगत करवाया।

दरअसल, दैनिक भास्कर में कालकाजी बांध के बंद पड़े नालों की मुहिम के साथ जुड़े पाठकों ने अपने मैसेज के जरिए बताया कि फोरलेन के लिए पूरे पहाड़ों को काट दिया गया है। पहाड़ तो कटे सो कटे, लेकिन उनका अधिकांश् मलबा भी वहीं पड़ा है। जिसके कारण निडोरा दुधिया तालाब में आने वाला पानी रुक गया। पाठकों के मैसेज पर भास्कर टीम जब इन तालाबों पर पहुंची तो सामने आया कि कैसे मानसून पूर्व प्रशासन की लापरवाही के कारण आज ये बांध सूखे हैं। यदि प्रशासन ने पहले सतर्कता दिखाई होती तो इन तालाबों में आज पानी होता।

अणगोर बांध के कैचमेंट एरिये की बनेगी रिपोर्ट

दुधिया तालाब

निडोरा तालाब

इधर, अणगोर बांध में पानी की कम आवक को लेकर भी अब प्रशासन सक्रिय हो गया है। सिंचाई विभाग की आर से अणगोर बांध के कैचमेंट एरिये की रिपोर्ट बनाई जा रही है, जिसमें इसकी जानकारी ली जाएगी कि कैचमेंट में कितने एनीकट चेक डेम बने है, जो अनावश्यक है। सिंचाई विभाग के एईएन प्रकाशचंद ने बताया कि इसके लिए रिपोर्ट बनाई जा रही है, जो जल्द ही एसडीएम कलेक्टर को सौंप दी जाएगी।

पाठकों ने मैसेज के जरिए बताए तालाबों के हाल

कालकाजीबांध की स्थिति पर दैनिक भास्कर की मुहिम से जुड़े शहरवासियों ने निडोरा और दुधिया तालाब की बदहाली पर भी मैसेज भेजे। पाठकों ने बताया कि प्रशासनिक अनदेखी के कारण ये दोनों तालाब अपना अस्तित्व खो रहे हैं, यदि मानसून से पूर्व इनके नाले खोले गए होते तो आज इनमें भरपूर पानी होता। इसके अलावा इन तालाबों की सफाई भी की जानी चाहिए थी, लेकिन प्रशासन ने तो मलबा हटाने के लिए एलएनटी कंपनी के प्रतिनिधियों को कहा और ही स्थानीय कर्मचारियों को निर्देश दिए गए। इसके अलावा जिले के भी विभिन्न गांवों से पाठकों ने तालाबों की बदहाली पर अपने विचार भेजे हैं।

शहर से सारणेश्वर महादेव मंदिर जाने वाले रास्ते पर दुधिया तालाब स्थित है। इस तालाब में हर साल बारिश के दौरान पानी भरा रहता था। इस तालाब में मातरमाता जी की पहाडिय़ों से बहने वाले झरनों का पानी सीधे आता था। अब फोरलेन निर्माण