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बिल से दुगुना चुका रहे, फिर भी नहीं जलती रोडलाइट
शहरमें जितनी स्ट्रीट लाइटें लगीं हैं, उन पर हर माह खर्च होने वाली बिजली का बिल शहरवासियों से वसूला जा रहा है। इसके बावजूद कई इलाकों में अंधेरा कायम है, लेकिन इससे भी बड़ी बात शायद आप भी नहीं जानते वह यह है कि रोड लाइट के नाम पर शहरवासियों से कुल लागत से भी दुगुना बिल वसूला जा रहा है। रात को कई इलाकों में बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को लेकर ‘भास्कर’ ने जब पड़ताल की तो यह सच सामने आया।
शहर की स्ट्रीट लाइटों के जलने का एक महीने में करीब 2.43 लाख रुपए खर्च आता है, जबकि निगम उपभोक्ताओं से 4.99 लाख रुपए वूसल रहा है। वहीं दूसरी तरफ नगरपरिषद प्रतिवर्ष शहर की स्ट्रीट लाइट्स के मेंटेनेंस पर हजारों रुपए खर्च कर रही है। इसके बाद भी शहर के मुख्य रास्तों और गली-मोहल्लों में अक्सर स्ट्रीट लाइट्स बंद रहती है। शहरवासी स्ट्रीट लाइट्स के पैसे हर माह अपनी जेब से चुकाने के बाद भी रात को सड़कों पर छाए अंधेरे से परेशान है।
उपभोक्ताओंसे 15 पैसे प्रति यूनिट वसूली
स्ट्रीटलाइट के लिए निगम 15 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से नगरीय उपकर चार्ज (अरबन सेस) जोड़कर उपभोक्ता को बिल भेजता है। यह योजना 6 जुलाई-10 से शुरू की गई थी। उस समय 10 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से वसूली होती थी, जो 31 मार्च-11 को जारी हुए नए सर्कुलर के बाद से 15 पैसे प्रति यूनिट हो गई। तब से लेकर आज तक शहर में जितनी भी रोड लाइट जलती हैं उनके बिल का भुगतान सभी शहरवासियों के जरिए होता है। फिर चाहे उनकी गली में रोड लाइट जले या जले। रोडलाइट की शिकायत पर सुनवाई हो या हो।
यानी बिल से दुगुनी राशि उपभोक्ताओं से वसूली जा रही है जबकि इस राशि में पूरा सिरोही जगमग हो सकता है।
...इधर वहीं रटा-रटाया जवाब
^कहींसे स्ट्रीट लाइट बंद होने की सूचना आती है तो उसे चालू करवा दिया जाता है। अगर कहीं लाइट्स बंद है, तो नोट करवा दें। ठीक करवा दी जाएगी। साथ ही बारिश के दौरान फॉल्ट होने से लाइट्स बंद हो जाती है, जिसे ठीक करवा दिया जाता है। -अमरीशगुप्ता, आयुक्त,नगरपरिषद
मई माह में
स्ट्रीट लाइट को लेकर दायर कर सकते है परिवाद
बिजलीके बिल में नगरीय उपकर आबादी एरिया में स्ट्रीट लाइट्स की व्यवस्था के लिए वसूला जाता है। उपभोक्ता मामलों के वकील के अनुसार बिल के माध्यम से नगरीय उपकर अदा करने की वजह से स्ट्रीट लाइट्स की सुविधा लेना संबंधित उपभोक्ता का का