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शहर की सड़कों पर बेसहारा गोवंश का जमावड़ा

7 वर्ष पहले
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शहरमें हर चौराहे पर बेसहारा पशुओं की भरमार है। रोजाना एक एक व्यक्ति बेसहारा पशुओं के हमले से घायल हो रहा है, लेकिन नगरपालिका प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। पशुओ के आतंक की वजह से शहरवासी खासे परेशान हैं। नगरपालिका की ओर से इन पशुओं की धरपकड़ को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करने के कारण आए दिन शहरवासियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

शहर के मस्जिद गली की बात करें तो यहां से लेकर राजकीय अस्पताल तक और सिरोही रोड तक पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। वहीं मुख्य बाजार या उदयपुर रोड पर भी चारो तरफ बेसहरा पशुओं की भरमार है। सड़क के बीचोंबीच बैठे इन पशुओं से वाहन चालकों को ही नहीं, बल्कि पैदल राहगीरों को भी परेशानी उठनी पड़ती है। कई बार इन पशुओं के आपस में लड़ने के कारण वाहन चालक भी दुर्घटनाग्रस्त होकर घायल हो जाते हैं। वहीं सड़क पर आसपास से गुजरने वाले राहगीर भी अक्सर इसका शिकार बन जाते हैं।

अभियान में एक दिन की थी पशुओं की धरपकड़

नई सरकार का गठन होने पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने क्लीन सिटी ग्रीन सिटी अभियान चलाया था, जिसके तहत नगरपालिका की ओर से सफाई अभियान की शुरूआत 23 दिसंबर को की गई थी। अभियान को लेकर 20 जनवरी 2014 को तत्कालीन कलेक्टर रघुवीर सिंह मीणा ने पािलका क्षेत्र का निरीक्षण किया था और ईओ भीम सिंह देवल ने एक दिन पूर्व आवारा पशुओं की धरपकड़ करवाकर शहीद भगत सिंह मैदान में बंद करवाया था। इस पर वहां पहुंचे कलेक्टर को शहरवासियों ने शहर की इस गंभीर संमस्या से अवगत कराया था, जिस पर उन्होंने चार-पांच दिन में शहर की समस्या कर पूरी तरह से समाधान करने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज उस बात को करीब 9 माह गुजर चुके हैं, लेकिन शहर की यह समस्या जस की तस बनी हुई है।

कई बार होती हैं दुर्घटना

शहरके मुख्य मार्गों ही नही, बल्कि भीतरी मार्गों पर भी इन आवारा पशुओं का डेरा लगा रहता है। कई बार इन आवारा पशुओ के बीच राह में बैठ जाने से स्थिति गंभीर हो जाती है। आवारा पशु आपस में लड़ते हुए वाहन चालकों या राहगीरो को अपनी चपेट में ले लेते हैं, जिससे हादसे हो जाते हैं।

नगर पालिका नही करती ठोस कार्रवाई

नगरपालिकाकी ओर से पशुओं को पकड़ने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती हैं। पशुपालक पशुओं को दिन भर खुला छोड़ देते हैं और शाम होते ही घर ले जाते हैं। इससे शहर में पूरे द