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बाहरीघाटे में दूध का टैंकर पलटा

7 वर्ष पहले
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गुजरातडेयरी का दूध से भरा एक टैंकर सोमवार को बाहरीघाटा में बेकाबू होकर पलट गया। टैंकर के पलटने से बाहरीघाटा में दूध की धारा बह निकली। पहाड़ों पर झरने से चल गए और जिधर रास्ता मिला दूध नदी की तरह बहता गया। टैंकर में करीब 25 हजार लीटर दूध था।

हादसे के बाद ड्राइवर और खलासी तो भाग गए, लेकिन आसपास के लोग ड्रम और बर्तन लेकर मौके पर पहुंच गए। दूध की मात्रा इतनी थी कि ऊंचाई से बहा तो झरने जैसा तथा धरातल पर नदी जैसा नजारा दिखा। पिछले दो सालों से लगातार इसी जगह पर टैंकर पलट रहा है। पिछले साल 18 अक्टूबर को इसी स्थान पर दूध का एक टैंकर पलट गया था और झरने बहने लगे, जबकि 17 अक्टूबर 2012 को भी दूध का टैंकर पलटा था। सोमवार को टैंकर पलटने के बाद हाईवे पर दोनों ओर जाम लग गया और बरसात में जैसे खड्डे पानी से भरते हैं दूध से भर गए। सूचना के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस जाम खुलवाने में लग गई और लोग दूध भरने में। काफी देर बार बाद क्षतिग्रस्त टैंकर को हाईवे से हटाया गया।

लगातार दूसरे दिन भी पलटा टैंकर

टनल से निकाला ट्रैफिक

पिछलेएक माह से बाहरीघाटा में गंभीर हादसा होने पर फोरलेन की नवनिर्मित टनल यातायात डायवर्ट के लिए मुख्य आधार बन गई है। रविवार शाम को भी गैस से भरा टैंकर पलटने के बाद बाहरीघाटा जाम हो गया था। ऐसे में पुलिस ने टनल से यातायात को डायवर्ट कर व्यवस्था को सुचारू किया। सोमवार को दूध का टैंकर पलटने पर भी यातायात को टनल से डायवर्ट किया। इससे पहले भी दो बार गैस से भरे टैंकर पलटने पर टनल से ट्रैफिक को चलाया था।

बहने लगे झरने

टैंकर पलटने के कुछ ही देर बार दूध के झरने बहने लगे। बाहरीघाटा पहाड़ी क्षेत्र है। ढलान होने से दूध को जिधर रास्ता मिला। वह पत्थरों और चट्टानों के बीच से बहने लगा। ऐसे लगा जैसे पहाड़ से दूध के झरने बह रहे हों।

बहता भी गया

लोग बर्तन लगाकर दूध एकत्रित कर रहे थे, लेकिन इस दौरान काफी मात्रा में दूध व्यर्थ भी बहता गया। सड़क पर दूध ऐसे बहा जैसे बरसात के बाद पानी बहता हो। मौके पर मौजूद लोगों के पास जो भी बर्तन था उन्होंने उसी में दूध को एकत्रित कर लिया।

बर्तन नहीं मिला बाल्टी ही सही

बाकी दिन ये बाल्टियां पानी भरने के काम आती थी। सोमवार को जब टैंकर पलटा तो लोग बाल्टियां लेकर दूध एकत्रित करने पहुंच गए। कुछ लोग तो पूरे परिवार समेत गए। नजारा ऐसा था