पेज 13 के शेष...
क्लबने संपूर्ण देहदान संकल्प प्रक्रिया अपनाते हुए मंगलवार को कलेक्टर वी. सरवन एडीएम प्रहलादसहाय नागा की मौजूदगी में दंपत्ति ने एक-दूसरे की साक्षी, जोन चेयरमैन प्रकाश प्रजापति एवं अन्य लोगों की मौजूदगी में स्टाम्प पेपर पर शपथ पत्र एवं आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर अपने शरीर का मृत्युपरांत देहदान उदयपुर में मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए संपूर्ण शरीर का अंगों सहित देहदान का संकल्प लिया। प्रजापति ने बताया सिरोही शहर में यह दूसरी बार देहदान संकल्प लिया गया है। इससे पूर्व व्याख्याता अल्पना सैनी ने देहदान का संकल्प लिया था। दंपत्ति के रूप में देहदान करने का यह पहला मामला है।
डिवाइडरतोड़ ट्रक...
टक्करइतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। वहीं, ट्रक का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। सूचना पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और कार को हटा कर यातायात बहाल कराया। हादसे में राजकोट (गुजरात)निवासी कार चालक शंकर सिंह पुत्र बदन सिंह की मौत हो गई, जिसका शव मोर्चरी रखवाया।
अस्पतालमें बढ़े...
इसकेअलावा हड्डी रोग विशेषज्ञ, सहायक रेडियोग्राफर एएनएम के पद भी लंबे समय से खाली पड़े हुए है। वही डॉक्टर नरेंद्रसिंह राजपुरोहित पिछले करीब छह महिनों से अस्पताल नहीं रहे है और स्वयं का निजी अस्पताल चला रहे है। वर्तमान में 1 सर्जन, 1 दंत विशेषज्ञ, 1 चिल्ड्रन विशेषज्ञ 1 आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी ही कार्यरत है।
100बैड का सपना रहा अधूरा : राज्यके तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अक्टूबर 2013 को टाउनहॉल के उद्घाटन समारोह दौरान नागरिकों की मांग पर इस अस्पताल को 100 बेड करवाने की घोषणा की थी। लेकिन दूसरे ही दिन विधानसभा के चुनाव की आचार संहिता लगने से वह घोषणा भी पुरी नहीं हो सकी है। राज्य में सत्ता परिर्वतन होने के बाद स्थानीय नागरिकों ने राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधराराजे सिंधिया को ज्ञापन भेजकर अस्पताल में 70 बैड ओर बढ़ाने की मांग भी की,लेकिन अभी तक यह मांग पुरी नहीं हुई है।
दवाकेंद्र बंद होने से मरीज परेशान : दवावितरण केंद्र के बाहर भी मरीजों की लंबी कतार लगी रहती है। राज्य सरकार के निर्देशानुसार 150 मरीजों पर एक फार्मास्टि का दवा केंद्र खुला रहना जरूरी है। अस्पताल में तीन दवा वितरण केंद्र है,लेकिन एक केंद्र पिछले लंबे समय से बंद पड़ा है। ऐसे में विशेषकर वृद्धजनों गंभीर बीमार मरीजों को दवाइयां लेने में अधिक परेशानी होती है। कहीं बार तो अधिक भीड़ होने पर मरीजों को घंटों तक लाइन में खड़ा रहना पड़ता है।