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शहर के मुद्दों में बजट सबसे नीचे, कैसे होंगे विकास के वादे पूरे

6 वर्ष पहले
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किसीभी निकाय का वार्षिक बजट कितना महत्वपूर्ण होता है यह बताने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। हर साल एक वित्तीय वर्ष के लिए संसद से लेकर पंचायत तक अपना बजट तय करती है। उसमें विकास के मुद्दों समेत नई योजनाओं पर चर्चा होती है और जरूरत के हिसाब से बजट पास किया जाता है।

सदस्य अपने अपने विचार रखते हैं और सुझाव आपत्ति दर्ज करवाते है। किसी भी निकाय के लिए बजट बैठक बड़ी अहम होती है और इसमें केवल बजट पर ही चर्चा होती है ताकि सदस्य विस्तार से अपनी बात कह सके और बजट पर समुचित बहस हो, लेकिन संभवत सिरोही नगर परिषद में बजट को लेकर कोई अहमियत नहीं है। पिछले चार साल से तो परिषद का बजट बिना किसी बैठक और चर्चा के जयपुर से ही पास हो रहा है और इस बार इस बार 12 फरवरी को बैठक हो रही है तो भी उसमें बजट के बिंदु को सबसे अंत में लिया गया है।

बैठक के एजेंडे में 33 विचारणीय बिंदु शामिल किए गए हैं। जिनमें बजट स्वीकृति का बिंदु 33वें नंबर पर है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाकई में बजट पर सदस्य सार्थक चर्चा कर पाएंगे। 12 फरवरी की इस बैठक के लिए बजट भी तैयार हो चुका है, लेकिन यह तैयार किया किसने, क्या इसे तैयार करने से पूर्व शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और सभी पार्षदों से सुझाव मांगे गए।

दक्षिण अफ्रीका मेंबजट से पहले सारी सूचनाएं जनता के बीच रखी जाती है। अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल बजट पार्टनरशिप के अनुसार दक्षिण अफ्रीका में बजट बनाने से पहले सारी सूचनाएं जनता के बीच चौक, चौराहे पर रख कर जनता की राय ली जाती है। लोगों से यह पूछा जाता है कि उन्हें इस बजट में क्या चाहिए। बच्चों तक की राय ली जाती है।

ब्राजील मेंजनता बनाती है बजट तभी वो दुनिया के अच्छे शहरों में शामिल आइए आपको ब्राजील का उदाहरण बताते हैं। यहां बजट की पूरी ऑनरशिप पब्लिक की है। 1989 में वर्कर्स पार्टी ने इसकी शुरुआत की थी। तब शहर की एक तिहाई जनसंख्या झुग्गियों में रहती थी। उसके पास बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं। स्थानीय लोग अपनी प्राथमिकताओं के हिसाब से यह तय करते कि पैसा कहां खर्च करना है।

15 फरवरी तक पास करना होता है बजट

नगरनिकायों में हर साल फरवरी माह में बोर्ड की बजट बैठक बुलाकर बजट पास किया जाता है। यदि 15 फरवरी तक कोई निकाय अपना बजट पास नहीं करता है तो सरकार उसे अपने यहां मंगवाकर पास कर देती है। पूर्व कांग्रेस सरकार ने यह नियम लागू किया था। ताकि निकाय राज्य के बजट से पहले पहले अपना बजट पास कर लें, लेकिन इसके बावजूद अनेक निकाय तय तारीख से पहले बोर्ड की बैठक बुलाकर अपना बजट पास नहीं करते और फिर अफसरों बाबुओं द्वारा जयपुर भेज दिया जाता है। वहीं से पास भी हो जाता है।

चार साल से हमारा बजट जयपुर में पास

पिछलेबोर्ड के कार्यकाल के दौरान सिर्फ एक बार हमारे शहर का बजट बोर्ड ने पास किया, बाकी चार साल वह बाबुओं द्वारा तैयार किया गया और फिर जयपुर भेज दिया गया। वहां से पास होकर गया और शहरवासियों को पता भी नहीं चला कि शहर की सरकार उनके लिए क्या योजनाएं बना रही है। वर्ष 2010 के दौरान केवल एक बार बोर्ड ने अपना बजट चर्चा कर पास किया। इसके बाद हर साल तय समय सीमा में बैठक नहीं हुई और बजट जयपुर से पास होता रहा। इस मामले में तत्कालीन आयुक्त शिवपालसिंह का वेतन भी रोक दिया गया था।

ऐसे स्मार्ट बने शहर

1.शहर की सफाई व्यवस्था मैकेनाइज्ड हो यानी सफाई कार्य पर पूरी निगरानी, कहीं भी चूक नहीं। आमजन चाहे तो उसकी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करवा सकें। इसके लिए 24 घंटे की हेल्पलाइन हो।

2. रोडलाइट की व्यवस्था भी चुस्त दुरुस्त हो। एक भी पोल ऐसा हो जिस पर लाइट खराब मिले। यदि ऐसा हो तो उस शिकायत को भी ऑनलाइन दूर करने की व्यवस्था हो।

3. वार्ड स्तर पर समस्या समाधान के लिए सेंटर बनें ताकि वार्डवासी अपनी शिकायत वहीं दर्ज करवा सकें।

4. परिषद का सारा काम ऑनलाइन हो। यहां तक कि निविदाएं भी ऑनलाइन जारी की जाएं ताकी पारदर्शिता बनी रही। किसी प्रोजेक्ट में क्या चल रहा है। इसकी जानकारी भी डे बाई डे अपडेट हो।

5. शहर में पिकनिक और मनोरंजन स्पॉट डेवलप किए जाएं। खासकर गार्डन्स की स्थिति को सुधारा जाए।

6. चौड़े रास्ते, खुला-खुला बाजार और दुर्घटना रहित सड़कें डेवलप की जाएं, ताकि बाहर से आने वाले लोग भी शहर को देखकर खुश हों।

1. सामुदायिकभवनों को व्यवस्थित करे : निकायखुद के सामुदायिक भवनों को व्यवस्थित कर उनसे आय बढ़ा सकती है।

2. पार्किंगशुल्क : बाजारमें पार्किंग स्थल बनाकर वहां से पार्किंग शुल्क लिया जात सकता है।

3. बिना पार्किंग कॉम्पलेक्स, अवैध कॉम्पलेक्स होटलों से जुर्माना वसूला जाए।

4. नगर पालिका अपनी खाली पड़ी जमीनों पर आयोजन स्थल डेवलप करे। विवाह उत्सव आदि में उन्हें किराये पर देकर आय बढ़ाई जा सकती है।

5. कॉमर्शियल स्कीम : नगर परिषद अपनी कॉमर्शियल स्कीम डेवलप करे, खुद के बाजार, कॉलोनी और कॉम्पलेक्स आदि डेवलप कर सकती है।

6. नगर परिषद की ओर से तैयार किए गए कियोस्क बदहाल पड़े हैं। उन्हें सही करवा कर किराये पर दिया जा सकता है या आवंटित किया जा सकता है। जो पहले से आवंटित हैं उन्हें शुरु करवाया जाए ताकि लोगों को रोजगार के साथ-साथ परिषद की आय भी बढ़े।

7. आय के अन्य साधनों पर विचार विमर्श के साथ ही केंद्र राज्य से अधिक से अधिक फंड जुटाने का प्रयास किया जाए क्योंकि दोनों जगह भाजपा की सरकार है और यहां भी बोर्ड भाजपा का है।

{ बजट की बैठक में केवल बजट पर चर्चा होनी चाहिए थी। एजेंडे में जिन विकास के मुद्दों को शामिल किया गया है उन्हें भी बजट में शामिल किया जाता और फिर यह बताया जाता कि उन कार्यों के लिए पैसा कहां से आएगा।

{ शहरवासियों के सुझाव और पार्षदों से विचार विमर्श कर महत्वपूर्ण बिंदु भी बजट में शामिल किए जाते ताकि विकास से जुड़े मुद्दों पर एकराय होती।

{ एक्सपर्ट से भी सलाह लेकर बजट में कुछ बिंदुओं को शामिल किया जाता जैसे कि नगर परिषद की आय कैसे बढ़ाई जाए।