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गुलाब की खेती से रोजाना 3 हजार की कमाई

7 वर्ष पहले
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एग्रीकल्चर रिपोर्टर | सिरोही

कहतेहै कि मेहनत से मिट्टी भी सोना उगलने लगती है। ऐसे ही मेहनतकश काश्तकार है धांता गांव निवासी बाबाराम मेघवाल, जिन्होंने अपनी लगन मेहनत से गुलाब की खेती की और अब रोजाना तीन से चार हजार रुपए की इनकम प्राप्त कर रहे हैं। बाबाराम गांव के ही थानाराम पुरोहित के कुएं पर काश्तकार है। वे पिछले छह साल से तीन बीघा खेत में गुलाब की खेती कर रहे हैं। तीन बीघा खेत से सीजन में प्रतिदिन 40-45 किलोग्राम गुलाब की पैदावार होती हैं। वर्तमान में गुलाब 70 रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिक रहा है। इस लिहाज उनकी प्रतिदिन की आय करीब 3,000 रुपए होती है। हालांकि, अभी सीजन नहीं होने से पैदावार थोड़ी कम हो गई है। यहीं नहीं गुलाब के साथ दो बीघा खेत में हजारी फूल भी पैदा करते हैं, जिसकी इनकम अलग है। शेष|पेज15



गुलाबकी खेती पर बाबाराम मेघवाल को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 10,000 रुपए के चैक और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया था।

जिलेकी होती है बिक्री : धांताके गुलाबों की बिक्री सिरोही जिले के विभिन्न शहरों कस्बों में होती है। बाबाराम ने बताया कि उनके यहां के गुलाब सिरोही, गोयली, जावाल, बरलूट, सिरोड़ी, अनादरा समेत आसपास के क्षेत्रों में बिकने जाते हैं। बारिश के दौरान पैदावार अधिक होती है। कड़ाके की ठंड और लू चलने पर पैदावार कम हो जाती है। आमदिनों में 10-12 किलोग्राम गुलाब उतरते है,जबकि सीजन में 40-45 किलोग्राम।

बांसवाड़ा भी गए यहां के पौधे

धांतामें तैयार गुलाब के पौधों को बांसवाड़ा भी भेजा गया था। किसान बाबाराम ने बताया कि (डबोक ) उदयपुर से लाए बीज कुएं पर बोए। इसके बाद तैयार पौधों में से कुछ पौधे बांसवाड़ा भी भेजे गए थे। उन्होंने बताया कि कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से गुलाब की खेती की गई, जिससे अच्छी पैदावार मिल रही है। आए दिन कृषि वैज्ञानिक विभिन्न जगहों के किसानों को यहां विजिट करा कर इस खेती के लिए प्रेरित करते है।

एक ही रंग के गुलाब

धांतामें पैदा किए जा रहे गुलाब एक ही रंग के हैं। किसान बाबाराम ने बताया कि यह गुलाब हैदराबाद की नई किस्म के हैं, जिसका बीज करीब 6 साल पहले उदयपुर के डबोक से खरीदा गया था। गुलाब की खेती की खासियत है कि इसे एक बार तैयार करने के बाद सालभर पैदावार मिलती है, जबकि अन्य फसलों को सीजन के मुताबिक बोना पड़ता है।

सिरोही. धांता गांव में तैयार गुलाब की खेती।