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विभाग कह रहा है निजी लैब की रिपोर्ट मान्य नहीं
डेंगू जैसी खतरनाक बीमारी के बढ़ते मरीजों के बावजूद चिकित्सा विभाग बना बेखबर
भास्करन्यूज | सिरोही
सर्दीकी दस्तक के साथ ही जिला अस्पताल में डेंगू से पीडि़त मरीज पहुंचने शुरू हो गए है। पिछले चार-पांच दिनों से अस्पताल में भर्ती शहर के भाटकडा कॉलोनी निवासी एक बच्ची और अमरनगर निवासी एक बच्चे में डेंगू के लक्षण मिलने से उनका इलाज चल रहा है।
वहीं, गुरुवार को एक ही दिन निजी लैबों में डेंगू के सात केस और सामने आए हैं यानि पिछले चार-पांच दिनों में नौ मामले सामने चुके हैं, फिर भी चिकित्सा विभाग बेखबर बना हुआ है। हालांकि, जिला अस्पताल के शिशु वार्ड में भर्ती डेंगू के दोनों की मरीजों की हालत में सुधार बताया जा रहा है, लेकिन जिलेभर में बढ़ती डेंगू के मरीजों की संख्या के बावजूद चिकित्सा विभाग इसकी रोकथाम के प्रति अलर्ट नहीं है। दिलचस्प पहलू यह है कि चिकित्सा विभाग निजी लैबों के रिपोर्ट में सामने आए डेंगू को नहीं मानता। चिकित्सा विभाग खुद की सरकारी लैब में डेंगू मिलने पर ही उसे अपने रिकार्ड में दर्ज करता है। सबसे बड़ी बात यह है कि सरकारी लैब की जांच में डेंगू नहीं बताया जाता। सरकारी लैब में रिअयर केस में डेंगू की पुष्टि की जाती है। अभी अस्पताल में भर्ती जिन दो बच्चों को सरकारी लैब में डेंगू की संदिग्ध माना है उनके द्वारा निजी लैब में जांच कराने पर डेंगू की पुष्टि हुई है।
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हालांकि,अस्पताल में भर्ती दोनों की बच्चों की हालत में सुधार बताया जा रहा है।
फिरआया डेंगू, इस बार भी इलाज नहीं : दोनोंमरीजों में डेंगू के शुरूआती लक्षण होने से उनका यहां इलाज संभव हो पाया, लेकिन यदि स्थिति ज्यादा गंभीर होती तो रेफर करने के अलावा अस्पताल के पास कोई चारा नहीं था। चूंकि डेंगू से पीडि़त मरीज के खून में प्लेटलेट्स की भारी कमी हो जाती है, जिन्हें प्लेटलेट्स चढ़ाने के लिए पैथोलॉजिस्ट की जरूरत होती है और अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में कई सालों से पैथोलॉजिस्ट का पद खाली चल रहा है। ऐसे में ब्लड बैंक में केवल खून लेने और चढ़ाने के अलावा अन्य काम नहीं हो रहे हैं। यदि पिछले दो सालों के रिकार्ड पर नजर डाले तो यहां डेंगू से पीडि़त मरीजों की संख्या बढ़ रही है। पिछले साल जिले में डेंगू के आठ मरीज मिले थे। इस बार भी नवंबर माह से डेंगू ने यहां दस्तक दी है। नवंबर माह के पहले सप्ताह में एक साथ द