पावापुरी में नानक संप्रदाय का धर्म सम्मेलन शुरू
पावापुरीतीर्थ जीव मैत्रीधाम में नानक जैन संप्रदाय के श्रावक श्राविकाओं का दो दिवसीय सम्मेलन बुधवार को साध्वी प्रर्वर्तनी महाश्रमणि डॉ. ज्ञानलताश्री के सानिध्य में शुरू हुआ। सम्मेलन में देश भर से 2 हजार से अधिक गुरु भक्त आए है, जिनको सिरोही, सिंदरथ, पावापुरी, केवलबाग, भेरूतारकधाम, जीरावल एवं वरमाण तीर्थ में ठहराया गया। अखिल भारतीय नानक प्राज्ञ संघ के चेयरमेन प्रकाश संचेती एवं उपाध्यक्ष सुरेन्द्र बाफना ने बताया कि गुरुमया 14 वर्ष तक दक्षिण भारत में धर्म का प्रचार-प्रसार विस्तार करने के बाद राजस्थान पधारी जिसके कारण राजस्थान मूल के गुरु भक्त उत्साह के साथ वे पावापुरी सम्मेलन मे एकत्रित हुए हैं। गुरुमया के साथ उनकी शिष्या डॉ. दर्शनलताश्री, डॉ. चारित्रलताश्री, किर्तिलताश्री, कल्पलताश्री, संयमलताश्री, सोम्यलताश्री एवं नुतन साध्वी ऋजुलताश्री के दर्शन वंदन का लाभ गुरु भक्तों को मिला। इस दौरान महाश्रमणि डॉ. ज्ञानलताश्री ने कहा कि जीवन में मां मातृभूमि का बहुत महत्व है तथा इन दोनों का जो कर्ज है उसे कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने च्मां की हर बात निराली हैज् मधुर गीत का वर्णन करते हुऐ मां के उपकारों का स्मरण कराया। उन्होंने नानक संप्रदाय के गुरुदेवों का स्मरण करते हुए कहा कि जीवन में शिक्षा, संस्कार एवं संघ एकता का विशेष महत्व है ओर इस संप्रदाय के साधु साध्वियों का यही लक्ष्य है कि वे ज्ञान चारित्र एवं दर्शन की शिक्षा हर भक्त में भरे। सम्मेलन में पारित प्रस्तावों की जानकारी देते हुए संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रिखबचंद पीपाड़ा ने बताया कि समाज की प्रतिभाओं को आगे बढाने एवं उनको शिक्षण में सहयोग करने के लिए च्प्रतिभा विकास योजनाज् शुरू की है। इस योजना में समाज का कोई भी विद्यार्थी सहयोग लेकर देश में कही भी शिक्षा ग्रहण कर सकेगा। इसके लिए सम्मेलन में मौजूद गुरुभक्तों ने मुक्त हस्त से आर्थिक योगदान की घोषणा की।
सिरोही. पावापुरीतीर्थ में श्रावक-श्राविकाओं का धूमधाम से नगर प्रवेश किया गया। फोटो| भास्कर