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गुरु बिना जीवन में घोर अंधेरा : शास्त्री

7 वर्ष पहले
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जोमनुष्य दयावान एवं कोमल होता है, वो ही हमेशा झुकता है। जीवन में गुरु का स्थान उच्च होता है। बिना गुरु के जीवन में घोर अंधेरा है, क्योंकि गुरु के बिना ज्ञान प्राप्त नहीं होता है और गुरू धारण करने से सत्संग का लाभ मिलता है और सत्संग इस भव सागर से पार लगा देता है। ये बात निकटवर्ती फुलण गांव में आयोजित जांभाणी हरिकथा के दौरान बलदेवानंद शास्त्री ने कही।

शास्त्री ने कहा कि जो मनुष्य यज्ञ करता है और उसमें एक भी यज्ञ मानवीय भूल से रह जाता है, वो यज्ञ कोई काम का नहीं है। उन्होंने धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्मत्व की इसी गुणवत्ता को मध्य नज़र रखते हुए सद्गुरू देव भगवान जांभोजी ने 29 नियमों की एक आचार संहिता हम लोगों को प्रदान की। इससे एक सुंदर एवं सुखी मानव समाज की कल्पना की गई। उन्होंने 29 धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस नियमों से एक श्रेष्ठ समाज का निर्माण होगा। जांभोजी ने विश्नोई पंथ की स्थापना करना उनका मुख्य उद्धेश्य था। उन्होंने अज्ञान-अंधकार में भेंटकर्ता जनता को ज्ञान की ज्योति जलाकर उनका कल्याण किया। वहीं रात को जंभेश्वर मंदिर प्रांगण में भजनों की सरिता बह पड़ी। जिसमें कलाकार संत राजूराम आसू पंडित की ओर से गुरुवाणी एक से बढ़कर भजनों की शानदार प्रस्तुतियां देकर सभी भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

मंदिरप्रांगण में वार्षिक मेला आज: मंदिरकमेटी के अध्यक्ष हरलाल वरड़ ने बताया कि हर वर्ष की भांति वार्षिक मेले में महंत भागीरथदास आचार्य का सानिध्य प्राप्त होगा। वहीं केंद्रीय ऊन बोर्ड अध्यक्ष जसवंतसिंह विश्नोई, सिवाना विधायक हमीरसिंह भायल, सांसद सोनाराम चौधरी, पूर्व विधायक कानसिंह कोटड़ी, पूर्व प्रधान मूलसिंह भायल, संचौर विधायक सुखराम विश्नोई, फलौदी विधायक पब्बाराम विश्नोई, गुड़ामालाणी विधायक लादूराम विश्नोई आदि मेले में शरीक होंगे।

मोकलसर. हरिकथाकरते शास्त्री।