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समृद्धि विकास के लिए मां की भक्ति जरूरी : नारायणगिरी

7 वर्ष पहले
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नवरात्रिपर मां की भक्ति पर सच्चे मन एवं श्रद्धा से की जाए तो शक्ति और समृद्धी का विकास होता है। द्वितीय नवरात्रि पर माता ब्रह्मचारी की महिमा एवं पूजा-अर्चना की जाती है। ये विचार सिवाना उपखंड की छप्पन की पहाड़ियों में स्थित गोगाजी धाम तेलवाड़ा में दशनाम जूना अखाड़ा काशी के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष नारायणगिरी महाराज ने श्रद्धालुओं को प्रवचन के रूप में दिए।

उन्होंने कहा कि साधक इस दिन अपने मन को मां के चारणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। मां दुर्गा का यह दूसरा स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंतफल देने वाला है। इनकी उपासना से मनुष्य में तप त्याग वैराग्य सदाचार संयम की वृद्धि होती है।

रमणिया. नारायणगिरीमहाराज।