वजूद खो रही ऐतिहासिक धरोहरें
इतिहास के पन्नों में विशेष गौरव हासिल सिवाना का दुर्ग तथा किसी जमाने में कई गांवों की प्यास बुझाने वाली पौराणिक बावड़ियां राजनैतिक प्रशासनिक उदासीनता के चलते दुर्दशा के आंसु बहा रहे हैं। राज्य में सरकार चाहे भाजपा की रही हो या कांग्रेस की, यहां के गौरवशाली इतिहास के बावजूद सिवाना को पर्यटन स्थान बनने के सपने को हमेशा ही निराशा ही हाथ लगी है। अब इसे स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कमजोरी कहे या सरकार की कमजोर इच्छा शक्ति। वजह चाहे कुछ भी हो मगर यह तो साफ है कि कभी गौरवशाली इतिहास का धनी रहा सिवाना क्षेत्र उपेक्षा का शिकार है।
उपेक्षाके शिकार ये ऐतिहासिक स्थल-
पूरेसिवाना क्षेत्र में कई ऐसे ऐतिहासिक स्थल हैं, जो वर्तमान में जर्जर हो चुके हैं। सिवाना का ऐतिहासिक दुर्ग जिसे इतिहास में अणकलों के नाम से जाना जाता है। जो आज जर्जरहाल में है। साथ ही दुर्ग में मौजूद राजमहल और त्रिकलश प्रासाद भी जर्जर हो गया है। वहीं हल्देश्वर पर्वत पर स्थित वीर दुर्गादास की पोल पूरी तरह से बिखर गई है।
वहीं किसी जमाने में दूर-दूर गांवों की प्यास बुझाने वाली मोकलसर कस्बे स्थित पौराणिक बावड़ी उचित देखभाल के अभाव में लोगों के लिए मात्र कूड़ा-दान बन कर रह गई है। इसके अलावा चारभुजा मंदिर, महाभारत कालीन भीमगोडा मंदिर, सात पहाड़ी के मध्य स्थित हल्देश्वर महादेव मंदिर कल्ला रायमलोत की समाधि को भी राजकीय सहयोग तथा संरक्षण की दरकार है।
मोकलसर. उपेक्षाका शिकार मोकलसर स्थित पुरानी ऐतिहासिक बावड़ी।
^इतिहास के पन्नों में विशेष गौरव प्राप्त सिवाना का दुर्ग तथा यहां की कलात्मक बावड़ियां प्रशासनिक उदासीनता के शिकार है। सरकार को इस ओर ध्यान देकर इनका संरक्षण करना चाहिए। ताकि आने वाली पीढ़ियों को यह गौरवशाली इतिहास उनको बता सके। जितेंद्रजांगिड़, कॉलेजस्टूडेंट्स
^सिवानाका गौरवशाली इतिहास को जीवित रखने के लिए सरकार को इनका संरक्षण करना चाहिए। रघुनाथरामचौधरी, पूर्वव्याख्याता
^सिवानाके गौरवशाली इतिहास को संरक्षण के लिए सरकार की प्राथमिकता है। इसको लेकर हमने विधानसभा में भी मांग उठाई थी। इसी के चलते पुरातत्व विभाग के चेयरमैन तथा कैबिनेट मंत्री ओंकारसिंह लखावत ने सिवाना का दौरा किया था। सिवाना में वीर दुर्गादास समेत कई वीर पुरुषों की प्रतिमाएं भी प्रमुख स्थानों पर लगाई जाएगी। हमीरसिंहभायल, विधायक,सिवाना
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