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विकास के लिए अपनानी होगी नई तकनीक

7 वर्ष पहले
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पालीके बाशिंदे अब स्मार्ट सिटी के ख्वाब देख रहे हैं। सड़कों के किनारे जगमगाती एलईडी, भूमिगत केबल व्यवस्था के बाद अब हाई स्पीड इंटरनेट सेवा मल्टी वैरायटी उद्योग धंधों की स्थापना सहित तकनीकी शिक्षा के नए विकल्प यहां देखना चाहते हैं। इधर, कदमों तले टूटी बिखरी सड़कें, बेसहारा गोवंश चरमराती ट्रैफिक व्यवस्था शहरवासियों के अरमानों पर सवाल खड़े कर रही है। इस बारे में हर क्षेत्र के इंजीनियरों से चर्चा की तो उनका कहना था कि नवीन तकनीक के आधार पर ही हमारे शहर को स्मार्ट सिटी बनाया जा सकता है।

शहीद स्मारक का लुक हो हेरिटेज, तालाब किनारे बने चौपाटी

शहरके शहीद स्मारक पर बगीचा तो विकसित हो गया और दुधिया रोशनी में भी चमकने लग गया है। इस स्मारक को हेरिटेज लुक देने के लिए बगीचे की दीवार पर राजस्थान की संस्कृति का प्रतीक चित्रों को उकेरा जाए तो यह स्थल हेरिटेज लुक के रूप में संवर सकता है। साथ ही लाखोटिया लोर्डिया तालाब के किनारे मुंबई की चौपाटी की तरह रात में खाने-पीने का बाजार विकसित किया जा सकता है।

मल्टीवैरायटी इंडस्ट्रीज

औद्योगिकशहर पाली में विविध उद्योगों से जल्दी ही स्मार्ट सिटी बन सकता है, मगर यहां पर प्रिंटेड सर्किट बोर्ड बनाने के कारखाने स्थापित करने की जरूरत है। प्रिंटेड सर्किट बोर्ड वाले उद्योग से पाली विकास के नए आयाम स्थापित कर सकता है। साथ ही मात्र 12 लाख के निवेश से ही प्रदूषण जल रहित उद्योग से स्मार्ट सिटी को विकास की ऊंचाइयां मिल सकती हैं। इन उद्योगों को संचालित करने के लिए सोलर पावर प्लांट, रेडियो मोबाइल फोन के पार्ट्स के लघु उद्योग स्थापित करने का भी यहां पर भरपूर मार्केट विकसित हो सकता है।

टेक्सटाइल उद्योग पर दिया जाए ध्यान

पालीके मुख्य टेक्सटाइल उद्योग के लिए कच्चा माल केमिकल आज भी बाहर से मंगाए जाते हैं। विभिन्न प्रकार के डाइज केमिकल सहित कई प्रकार का रॉ मेटेरियल यहां तैयार किया जा सकता है। साथ ही यहां तकनीकी संसाधनों मशीनों की मरम्मत के लिए समय-समय पर वर्कशॉप लगाकर यहां के इंजीनियर को बड़ी से बड़ी समस्याएं सुलझाने के लिए तैयार किया जा सकता है। प्रस्तावित पॉवरलूम उद्योग को धरातल पर लाने में सरकारी सहयोग की भावना को प्रतिपादित करने से ग्रे-टू-पेक की योजना साकार हो सकती है।

(एक्सपर्टपैनल - इंजीनियर कानसिंह राणावत, शंभुलाल शर्मा, मनीष माथुर, जेपी लो