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पढ़े-लिखे युवाओं के हाथ गांवों की सरकार

6 वर्ष पहले
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पाली। पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव में पहली बार शिक्षा की अनिवार्यता करने का नतीजा यह है कि इस बार पढ़े-लिखे युवाओं के हाथ में गांव की सरकार की कमान है। जिले की 10 पंचायत समितियों में निर्वाचित हुए 8 प्रधानों के पास ग्रेजुएट होने के साथ बीएड, इंजीनियरिंग तथा अन्य व्यवसायिक डिग्रियां भी हैं।
दो युवाओं ने तो पढ़ाई करते-करते राजनीति में कदम रखा। इनके विकास के विजन को मतदाताओं ने भी समर्थन दिया। राजनीति में यह नया ट्रेंड है, जिसे ग्रामीणों के साथ ही राजनीतिक क्षेत्र में गांव की दशा दिशा को नई सोच के बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

मुंबई से चुनाव लड़ने बुलाया, अब रानी में प्रधान

मुंबई में ही रहकर अपने पति के साथ कारोबार में हाथ बंटाने वाली रानी प्रधान नौरतन चौधरी बीए तक पढ़ी-लिखी हैं। भाजपा को उम्मीदवार की जरूरत थी। उन्हें मुंबई से बुलाकर यहां चुनाव लड़वाया। वे निर्विरोध जीतीं।

स्कूल चला रहे थे, चुनाव लड़कर बने उप प्रधान

मारवाड़जंक्शन पंचायत समिति क्षेत्र से उप प्रधान बने भंवरलाल मेघवाल बीए, बीएड डिग्रीधारी हैं। वे अपने गांव धनला में निजी स्कूल चलाते हैं। बच्चों के जरिए ही मास्साब का प्रचार भी हुआ। वे चुनाव जीत गए।

सोजत में प्रधान चुनी गई गिरिजा कंवर जिले में सबसे कम 22 साल की हैं। उनके पिता गिरवरसिंह राठौड़ जरूर भाजपा में सक्रिय हैं। एमकॉम फाइनल ईयर की छात्रा गिरिजा राजनीति का ककहरा भी नहीं जानतीं। सोजत प्रधान की सीट महिला वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद उसे भाजपा ने टिकट दिया और वे प्रधान बनने में कामयाब हो गई।
बाली से उप प्रधान बने राकेश कुमार दवे भी बीए करने के बाद एमआर बन गए थे। शिक्षा की अनिवार्यता के चलते उनको चुनाव लड़ने का मौका मिला। अब उप प्रधान भी बन गए हैं।

ट्रैक्टर चलाकर मजदूरी करने वाला निर्विरोध बना देसूरी का प्रधान

देसूरी के इतिहास में पहली बार एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हुई प्रधान पद की कुर्सी को लेकर दोनों ही दलों के पास पंचायत समिति में उम्मीदवारों का टोटा था। शिक्षा की अनिवार्यता के पेंच के कारण उम्मीदवारों को तलाशने के लिए काफी मेहनत हुई।
इस दौरान सादड़ी के समीप राजपुरा गांव में दसवीं पढ़ने के बाद ट्रैक्टर चलाकर मजदूरी करने वाले भैराराम मीणा को स्थानीय भाजपा नेताओं के साथ ही ऊर्जा राज्य मंत्री पुष्पेंद्रसिंह राणावत ने उसे राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। एक बार तो भैराराम ने इनकार कर दिया। इसके बाद वह चुनाव लड़ने के लिए तैयार हुआ। सदस्य का चुनाव जीतकर अब वे निर्विरोध प्रधान बन गए।

पढ़ी-लिखी गृहणियों को भी मिला मौका

जैतारणप्रधान रसाल कंवर, उप प्रधान रेखा कुमावत, रायपुर प्रधान शोभा चौहान, साेजत में उपप्रधान ममता कंवर राजपुरोहित गृहिणी हैं। वे पहली बार में ही जीतकर प्रधान भी बन गईं। शोभा चौहान बीकानेर एडीएम राजेश चौहान की प|ी हैं। ग्रेजुएट होने के कारण ही उनको बुलाकर भाजपा ने टिकट दिया और वे प्रधान बनीं। ममता कंवर भी राजनीति में नई हैं, मगर वे ग्रेजुएट हैं।

गिरिजा कंवर प्रधान,सोजत

नवलकिशोर रावल उपजिला प्रमुख

श्रवण बंजारा प्रधान,पाली

(ग्रेजुएट में 3 बीएड, एक के पास होटल मैनेजमेंट और 1 के पास फार्मा डिग्री भी है)

05 जनप्रतिनिधि10वीं पास

06 41साल से अधिक

15 जनप्रतिनिधिग्रेजुएट

14 40साल तक के।